वैश्विक संकट के समय भारत और फ्रांस ने बहुध्रुवीयता और स्थिरता के लिए एकजुटता दिखाई

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पेरिस में अपने समकक्ष जीन-नोएल बैरोट के साथ वार्ता की। दोनों नेताओं ने वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में “रणनीतिक साझेदारों” के रूप में आपसी सहयोग और घनिष्ठ परामर्श पर जोर दिया।

यात्रा का संदर्भ और उद्देश्य

डॉ. जयशंकर 4 से 9 जनवरी, 2026 तक फ्रांस और लक्ज़मबर्ग की आधिकारिक यात्रा पर हैं। पेरिस में उनकी बैठकें भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी की प्रगति और वैश्विक महत्व के मुद्दों पर केंद्रित हैं। इस यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण फ्रांसीसी राजदूतों के सम्मेलन के 31वें संस्करण में मुख्य अतिथि के रूप में उनका संबोधन भी है।

साझेदारी को और गहरा करने पर जोर

बैठक के आरंभ में दिए गए अपने वक्तव्य में डॉ. जयशंकर ने फ्रांस को “भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक” बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के निरंतर संवाद रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक हैं। विशेष रूप से, उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह बैठक “वैश्विक अनिश्चितता के व्यापक संदर्भ” में हो रही है, और ऐसे में रणनीतिक साझेदारों का आपस में घनिष्ठ परामर्श स्वाभाविक है। डॉ. जयशंकर ने कहा कि “बहुध्रुवीयता के लिए प्रतिबद्ध दो राष्ट्रों के तौर पर” एकसाथ काम करना न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि “इस समय वैश्विक राजनीति को स्थिर करने” के लिए भी महत्वपूर्ण है।

एक टिकाऊ और विश्वसनीय साझेदारी

भारत और फ्रांस के बीच 1998 में शुरू हुई रणनीतिक साझेदारी समय की कसौटी पर खरी उतरी है और लगातार विस्तारित हो रही है। यह साझेदारी केवल रक्षा सौदों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके प्रमुख आयाम इस प्रकार हैं:

· रक्षा एवं सुरक्षा: राफेल विमान और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों जैसे प्रोजेक्ट इस क्षेत्र में सहयोग के प्रमुख उदाहरण हैं।
· अंतरिक्ष एवं परमाणु ऊर्जा: इसरो और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी सीएनईएस के बीच दशकों से सहयोग चल रहा है। नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग एक प्रमुख स्तंभ है।
· अर्थव्यवस्था एवं प्रौद्योगिकी: ऊर्जा (टोटल एनर्जीज), एयरोस्पेस (एयरबस, सफ्रान), और रेल परिवहन (अल्स्टोम) जैसे क्षेत्रों में फ्रांसीसी कंपनियों का भारत में महत्वपूर्ण निवेश है।
· सांस्कृतिक संबंध एवं लोगों से लोगों का जुड़ाव: डॉ. जयशंकर ने पेरिस में एक भारत-फ्रांस टेक्सटाइल प्रदर्शनी का दौरा किया और फ्रांस-भारत युवा प्रतिभा कार्यक्रम के प्रतिभागियों से भी मुलाकात की।

चुनौतियों से घिरी वैश्विक पृष्ठभूमि

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब फ्रांस आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता और बजट को लेकर गतिरोध जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी की नींव मजबूत है और दीर्घकालिक हितों के मद्देनजर यह स्थिर बनी रहेगी। वहीं, अमेरिका द्वारा ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की संभावना जैसे वैश्विक मुद्दे भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चिंताएं पैदा कर रहे हैं। ऐसे में, भारत और फ्रांस जैसे समान विचारधारा वाले देशों का एकसाथ आना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।

दोनों विदेश मंत्रियों ने भविष्य की द्विपक्षीय सहयोग योजनाओं पर चर्चा की, जिसमें “हॉरिजन 2047 रोडमैप” को आगे बढ़ाने के तरीके भी शामिल हैं। इस वर्ष भारत ने ब्रिक्स और फ्रांस ने जी7 की अध्यक्षता संभाली है, इसलिए द्विपक्षीय वार्ता के साथ-साथ बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय भी चर्चा का हिस्सा रहा। डॉ. जयशंकर ने यह भी पुष्टि की कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा जल्द ही होने वाली है और वर्तमान वार्ता उसकी तैयारी का भी हिस्सा है।

 

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Author: ainewsworld

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