NEET री-एग्जाम के दौरान कोटा में दिखी इंसानियत की मिसाल, अभिभावकों के लिए खोले घर के दरवाजे

Kota। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध कोटा शहर ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि उसकी पहचान केवल शिक्षा और कोचिंग संस्थानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की मानवीय संवेदनाएं भी उतनी ही मजबूत हैं।NEET री-एग्जाम के दौरान भीमगंज थाना क्षेत्र के आसपास स्थित परीक्षा केंद्रों पर बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को छोड़ने पहुंचे थे। परीक्षा की प्रक्रिया, रिपोर्टिंग और सुरक्षा जांच के कारण कई अभिभावकों को घंटों तक बाहर इंतजार करना पड़ा। ऐसे समय में स्थानीय निवासी गिरिराज खंडेलवाल एवं उनकी धर्मपत्नी शिखा खंडेलवाल ने एक प्रेरणादायक पहल करते हुए अपने घर के दरवाजे अभिभावकों के लिए खोल दिए।


उन्होंने बैठने की व्यवस्था की, बारिश और धूप से बचने के लिए आश्रय उपलब्ध कराया तथा अपने घर की आवश्यक सुविधाएं भी सभी के लिए सुलभ कर दीं। इससे विशेष रूप से महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दूर-दराज से आए अभिभावकों को बड़ी राहत मिली।


इस सेवा कार्य की सबसे खास बात यह रही कि धीरे-धीरे आसपास के लोग भी इस नेक कार्य से जुड़ते चले गए। किसी ने चाय की व्यवस्था की, किसी ने नाश्ते का इंतजाम किया तो किसी ने शीतल पेय उपलब्ध कराए। पूरे मोहल्ले ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि इंतजार कर रहे अभिभावकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यह पहल केवल सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों के बीच विश्वास और सामाजिक सहयोग का संदेश भी लेकर आई। परीक्षा संबंधी नियमों के कारण कुछ विद्यार्थियों को अपने आभूषण बाहर उतारने पड़े। ऐसे ही एक मामले में एक छात्रा ने अपने आभूषण सुरक्षित रखने के लिए भरोसा जताया और निश्चिंत होकर परीक्षा देने चली गई। यह घटना समाज में विश्वास और पारस्परिक सम्मान की भावना को दर्शाती है।


आज जब अक्सर सामाजिक संवेदनशीलता में कमी की चर्चा होती है, तब कोटा के इस मोहल्ले ने यह साबित किया कि निस्वार्थ सेवा और मानवता आज भी जीवित हैं। बिना किसी प्रचार या व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा के लोगों की सहायता करना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि किसी भी शहर की वास्तविक पहचान केवल उसकी उपलब्धियों से नहीं, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के व्यवहार, सहयोग और मानवीय मूल्यों से बनती है। कोटा की यह पहल न केवल अभिभावकों के लिए राहत बनी, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश भी छोड़ गई।


मानवता की यही भावना समाज को जोड़ती है और एक बेहतर भविष्य की दिशा में प्रेरित करती है।

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Author: ainewsworld

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