राष्ट्रपति मुर्मु ने राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 के 24 वैज्ञानिकों को किया सम्मानित

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 प्रदान किए। इस दूसरे संस्करण में देश के 24 प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों एवं शोधकर्ताओं को चार अलग-अलग श्रेणियों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु ने देश के वैज्ञानिक समुदाय द्वारा किए जा रहे अग्रणी शोध एवं नवाचारों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों, बल्कि राष्ट्र निर्माण में विज्ञान की भूमिका को रेखांकित करते हैं।

किन श्रेणियों में मिले पुरस्कार?

इस वर्ष पुरस्कार चार मुख्य श्रेणियों में दिए गए:

1. विज्ञान रत्न: जीवन भर विज्ञान के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए।
2. विज्ञान श्री: स्थापित वैज्ञानिकों के उत्कृष्ट कार्य को मान्यता।
3. विज्ञान युवा: युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहन।
4. विज्ञान टीम: टीम के रूप में किए गए उत्कृष्ट अनुसंधान एवं नवाचार के लिए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को मशहूर एस्ट्रोफिजिसिस्ट जयंत नारलिकर को कॉस्मोलॉजी और साइंस को पॉपुलर बनाने में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत विज्ञान रत्न पुरस्कार दिया. यह पुरस्कार पुणे में मौजूद इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के डायरेक्टर आर श्रीानंद ने लिया.

मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में हुए एक फंक्शन में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार भी दिया. राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार के दूसरे एडिशन में, चार कैटेगरी – विज्ञान रत्न, विज्ञान श्री, विज्ञान युवा और विज्ञान टीम – में जाने-माने साइंटिस्ट को 24 पुरस्कार दिए गए.

यूसुफ मोहम्मद शेख को एटॉमिक एनर्जी के फील्ड में अवॉर्ड जाने-माने एग्रीकल्चर साइंटिस्ट ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह को एग्रीकल्चरल साइंस के फील्ड में उनके योगदान के लिए विज्ञान श्री अवॉर्ड दिया गया. उन्हें गेहूं ब्रीडर के नाम से जाना जाता है. वहीं, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर के फिजिक्स ग्रुप के डायरेक्टर यूसुफ मोहम्मद शेख को एटॉमिक एनर्जी के फील्ड में उनके योगदान के लिए विज्ञान श्री अवॉर्ड दिया गया.IIT-मद्रास के प्रदीप थलप्पिल- सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के के थंगराज ने बायोलॉजिकल साइंसेज के फील्ड में अवॉर्ड जीता है और IIT-मद्रास के प्रदीप थलप्पिल ने केमिस्ट्री के फील्ड में विज्ञान श्री जीता है.इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नोलॉजी के वाइस चांसलर अनिरुद्ध भालचंद्र पंडित को इंजीनियरिंग साइंसेज के फील्ड में विज्ञान श्री और नेशनल एनवायर्नमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर एस वेंकट मोहन को एनवायर्नमेंटल साइंस के फील्ड में अवॉर्ड मिला.रामकृष्ण ऑर्डर के साधु और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च में मैथ के प्रोफेसर महान महाराज को मैथ और कंप्यूटर साइंस के फील्ड में विज्ञान श्री मिला.लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर के जयन एन को स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी में उनके योगदान के लिए विज्ञान श्री अवॉर्ड मिला.राज्य के अनुसार जगदीश गुप्ता कपुगंती (एग्रीकल्चरल साइंस), सतेंद्र कुमार मंगरौठिया (एग्रीकल्चरल साइंस), देबरका सेनगुप्ता (बायोलॉजिकल साइंसेज), दीपा अगाशे (बायोलॉजिकल साइंसेज), दिब्येंदु दास (केमिस्ट्री), वलीउर रहमान (अर्थ साइंस), और अर्काप्रवा बसु (इंजीनियरिंग साइंसेज) को विज्ञान युवा अवॉर्ड मिला.सव्यसाची मुखर्जी (मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस), श्वेता प्रेम अग्रवाल (मैथमेटिक्स और कंप्यूटर साइंस), सुरेश कुमार (मेडिसिन), अमित कुमार अग्रवाल (फिजिक्स), सुरहुद श्रीकांत मोरे (फिजिक्स), अंकुर गर्ग (स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी), और मोहनशंकर शिवप्रकाशम (टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन) भी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें विज्ञान युवा अवॉर्ड मिला.काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) की एरोमा मिशन टीम ने विज्ञान टीम अवॉर्ड जीता.

पुरस्कारों का उद्देश्य

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का प्राथमिक उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीक-आधारित नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में वैज्ञानिकों, तकनीकविदों और नवप्रवर्तकों के असाधारण एवं प्रेरणादायक योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना है। यह पहल देश में वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने और युवा पीढ़ी को इस क्षेत्र में आगे आने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह का महत्व

राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह समारोह देश के सर्वोच्च वैज्ञानिक सम्मानों में से एक है। यह न केवल विजेताओं के लिए, बल्कि पूरे वैज्ञानिक समुदाय के लिए गर्व का क्षण होता है। इससे देश भर के शोधकर्ताओं को अपने कार्यों में और अधिक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस वर्ष पुरस्कारों के लिए देशभर से मिले नामांकनों में से चयन एक कठिन प्रक्रिया के बाद किया गया, जिसमें शोध की गुणवत्ता, नवाचार और राष्ट्रीय विकास में उसकी संभावित उपयोगिता जैसे मानदंडों को प्रमुखता दी गई।

राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2025 का यह आयोजन एक बार फिर भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा और नवाचार क्षमता का प्रमाण है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा इन प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाना देश के लिए एक गौरवशाली पल है, जो यह संदेश देता है कि भारत का भविष्य विज्ञान और तकनीक की मजबूत नींव पर ही खड़ा होगा। यह पुरस्कार देश के वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम और लगन को सलाम करते हैं।

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज