5G के बाद क्या ? 6G का भारतीय विजन ‘सस्टेनेबिलिटी’ के इर्द-गिर्द,वेस्ट टू वेल्थ: AI और Blockchain से भारत का दूरसंचार क्षेत्र तलाश रहा संसाधनों का खजाना

वन अर्थ, वन नेटवर्क: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार ने परिपत्र अर्थव्यवस्था के लिए उठाया बड़ा कदम
वेस्ट टू वेल्थ: AI और Blockchain से भारत का दूरसंचार क्षेत्र तलाश रहा संसाधनों का खजाना

भारत का दूरसंचार क्षेत्र, जो दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में से एक है, अब अपने विकास के तरीके को नया रूप देने पर काम कर रहा है। दूरसंचार विभाग (DoT) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) ने आज यहां “एडवांसिंग सर्कुलर इकॉनॉमी इन द टेलीकॉम सेक्टर” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला का उद्देश्य पारंपरिक ‘लेने, बनाने और नष्ट करने’ वाली रैखिक अर्थव्यवस्था से हटकर एक ऐसी ‘परिपत्र अर्थव्यवस्था’ की दिशा में रास्ता तैयार करना है, जहां संसाधनों का पुन: उपयोग, नवीनीकरण और पुनर्चक्रण किया जाता है।

भारतीय दूरसंचार: एक वैश्विक शक्ति का उदय

अंतरराष्ट्रीय पाठकों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारत का दूरसंचार क्षेत्र केवल स्थानीय महत्व का नहीं है। 1.18 अरब से अधिक ग्राहकों के साथ, यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दूरसंचार बाजार है। यह क्षेत्र दुनिया की सबसे तेज 5G तैनाती में से एक का नेतृत्व कर रहा है और अपने उपकरण निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि देख रहा है, जो 2023-24 में 1.49 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। यह वृद्धि और वैश्विक पहुंच ही वह कारण है कि इसकी स्थिरता संबंधी प्रथाओं में बदलाव की दिशा में किया गया कोई भी कदम वैश्विक प्रभाव रखता है।

एक रणनीतिक आवश्यकता के रूप में स्थिरता

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में दूरसंचार विभाग के कार्यकारी सचिव, श्री आर.एन. पालाई ने स्पष्ट किया कि दूरसंचार क्षेत्र में स्थिरता और परिपत्रता अब “वैकल्पिक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अनिवार्यता” है। उन्होंने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि हालांकि भारत में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में दूरसंचार क्षेत्र का योगदान 2% से कम है, लेकिन लगभग 1.2 अरब उपयोगकर्ताओं तक इसकी पहुंच इसे जिम्मेदार प्रथाएं अपनाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करती है।
श्रीपालाई ने जोर देकर कहा कि स्थिरता केवल नेटवर्क में अक्षय ऊर्जा के उपयोग तक सीमित नहीं हो सकती। इसमें दूरसंचार उत्पादों और बुनियादी ढांचे के पूरे जीवनचक्र को शामिल करना होगा, जिसमें ई-कचरा प्रबंधन, ‘मरम्मत के अधिकार’ (राइट-टू-रिपेयर) और टिकाऊ डिजाइन जैसे मुद्दे शामिल हैं।

प्रस्तावित कार्य योजना: संवाद से क्रियान्वयन की ओर

कार्यशाला के दौरान दूरसंचार विभाग ने भारतीय दूरसंचार क्षेत्र के लिए एक परिपत्र अर्थव्यवस्था कार्य योजना का प्रस्तुतिकरण दिया। विचार-विमर्श के केंद्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यावहारिक समाधान और नीतिगत हस्तक्षेप रहे:

प्रमुख कार्यक्षेत्र एवं प्रस्ताव

· टिकाऊ डिजाइन एवं निर्माण: लंबे जीवन, मरम्मत योग्यता और पुनर्चक्रण क्षमता को बढ़ावा।
· संपत्ति जीवनचक्र प्रबंधन: नेटवर्क उपकरणों के उन्नयन, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण की कुशल प्रक्रिया स्थापित करना।
· ई-कचरा कमी एवं प्रबंधन: औपचारिक और सुरक्षित रीसाइक्लिंग चैनलों को मजबूत करना। (भारत प्रति वर्ष 3.8 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक ई-कचरा पैदा करता है)।
· डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली: आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता के लिए ब्लॉकचेन और IoT जैसी तकनीकों का उपयोग।
· टिकाऊ खरीदारी: ऐसे उत्पादों और विक्रेताओं को प्राथमिकता देना जो परिपत्र सिद्धांतों का पालन करते हैं।
· नीतिगत सहयोग: ‘विस्तारित निर्माता उत्तरदायित्व’ (EPR) को लागू करना और रिफर्बिश उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करना।

डिजिटल उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका

एक तकनीकी सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि कैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे डिजिटल उपकरण परिपत्र संक्रमण में सहायक हो सकते हैं। इन तकनीकों से आपूर्ति श्रृंखला में सामग्री की ट्रैकिंग, पारदर्शिता में सुधार और उत्पादकों के EPR दायित्वों के प्रबंधन में मदद मिल सकती है।

वैश्विक संदर्भ और सतत विकास लक्ष्य

भारत का यह प्रयास संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG), विशेष रूप से लक्ष्य 9 के अनुरूप है, जो “लचीले बुनियादी ढांचे, समावेशी और सतत औद्योगीकरण तथा नवाचार को बढ़ावा देने” पर केंद्रित है। UNDP पहले से ही भारत सरकार के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी परियोजना पर काम कर रहा है, जिसमें GEF द्वारा $15 मिलियन और सह-वित्तपोजन सहित कुल $120 मिलियन का निवेश शामिल है। यह दूरसंचार क्षेत्र में हुई कार्यशाला को एक व्यापक राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बनाता है।

कार्यशाला का समापन इस साझी प्रतिबद्धता के साथ हुआ कि भारत के दूरसंचार क्षेत्र को अब “संवाद से क्रियान्वयन की ओर” बढ़ना चाहिए। भविष्य का रोडमैप एक साझा स्वामित्व के मॉडल पर आधारित है:

· सरकार नीतिगत दिशा और सक्षम परिस्थितियाँ प्रदान करेगी।
· उद्योग नवाचार और व्यावहारिक अनुप्रयोग को आगे बढ़ाएगा।
· साझेदार संगठन (जैसे UNDP) कार्यान्वयन, क्षमता निर्माण और वित्तपोषण में सहयोग देंगे।

अंतरराष्ट्रीय निवेशकों एवं हितधारकों के लिए निहितार्थ

· नए बाजार के अवसर: टिकाऊ डिजाइन, रीसाइक्लिंग प्रौद्योगिकी और डिजिटल ट्रैकिंग समाधानों के क्षेत्र में निवेश के लिए एक उभरता हुआ बाजार।
· आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन: परिपत्र प्रथाओं से दूरसंचार हार्डवेयर के लिए महत्वपूर्ण खनिजों पर निर्भरता कम हो सकती है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुरक्षित होगी।
· वैश्विक मानकों की अनुरूपता: भारत के प्रयास यूरोपीय संघ जैसे क्षेत्रों में उभरते सख्त परिपत्र अर्थव्यवस्था नियमों के अनुरूप हैं, जिससे व्यापारिक सहयोग आसान हो सकता है।

यह कार्यशाला भारत के महत्वाकांक्षी 6G दृष्टि का एक अभिन्न अंग है, जो न केवल गति और पहुंच, बल्कि किफायत, स्थिरता और सर्वव्यापकता पर भी केंद्रित है। एक अधिक परिपत्र दूरसंचार क्षेत्र की दिशा में यह कदम नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के माध्यम से भारत की आर्थिक वृद्धि को सुदृढ़ करने की दिशा में एक स्पष्ट कदम है।

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Author: ainewsworld

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