पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने मतदाता सूचियों में चौंकाने वाली विसंगतियों का पर्दाफाश किया है। कई लाख मतदाताओं के रिकॉर्ड में पिता का नाम गलत पाया गया है, जबकि कई लाख से अधिक प्रविष्टियों में एक ही व्यक्ति का नाम माता और पिता दोनों के रूप में दर्ज है। ये खुलासे चुनावी प्रक्रिया की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। #पश्चिमबंगालSIR और #वोटरलिस्टविसंगतियाँ
SIR जांच में उजागर हुए चौंकाने वाले आंकड़े
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और डेटा विसंगतियों का पता चला है। चुनाव आयोग द्वारा 2002 की मतदाता सूचियों के आधार पर किए गए पारिवारिक मानचित्रण और डेटा विश्लेषण ने गंभीर त्रुटियां उजागर की हैं, जिनके बाद आयोग ने विस्तृत सत्यापन और घर-घर जाकर जांच का आदेश दिया है।
मुख्य विसंगतियां इस प्रकार हैं:
· पिता के नाम में भारी गड़बड़ी: कुल 85,01,486 मामलों (कुल मतदाताओं का लगभग 11.09%) में पिता का नाम गलत या असंगत पाया गया।
· एक ही नाम माता-पिता दोनों: 13,46,918 प्रविष्टियों में एक ही व्यक्ति का नाम माता और पिता दोनों के कॉलम में दर्ज मिला, जो तार्किक रूप से असंभव है।
· अवास्तविक आयु अंतर: 11,95,230 मामलों में मतदाता और उसके माता-पिता की आयु का अंतर 15 वर्ष से भी कम पाया गया, जो जैविक रूप से संदिग्ध है।
· असामान्य रूप से अधिक बच्चे: 24,21,133 मतदाताओं के छह या उससे अधिक बच्चे दर्ज हैं, जो एक असामान्य संख्या है।
· गलत लिंग डेटा: 13.5 लाख के करीब प्रविष्टियों में लिंग संबंधी जानकारी गलत पाई गई।
निगरानी तंत्र और सुधार की प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने इन विसंगतियों के समाधान के लिए कड़े कदम उठाए हैं। बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अब प्रभावित मतदाताओं से संपर्क कर घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। जिन मतदाताओं के नामांकन फॉर्म में गंभीर त्रुटियां पाई गई हैं या माता-पिता की आयु में संदिग्ध अंतर है, उन्हें सुनवाई के लिए आधिकारिक तौर पर बुलाया जाएगा।
आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने से पहले, सभी राजनीतिक दलों के बूथ-लेवल एजेंटों (BLA) को मृत, स्थानांतरित और अनुपस्थित मतदाताओं की सूची उपलब्ध कराई जाए। यह प्रक्रिया पारदर्शिता बढ़ाने और सभी हितधारकों को सूचित रखने के लिए अपनाई गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आगामी चुनावी रणनीति
इन खुलासों ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। भाजपा नेता शंकर घोष का कहना है कि ये विलोपन साबित करते हैं कि बंगाल में SIR की आवश्यकता क्यों थी, क्योंकि यह तृणमूल कांग्रेस की असली ताकत रहे फर्जी मतदाताओं की संख्या को उजागर करता है।
मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया की समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जबकि उत्तर प्रदेश सहित छह अन्य राज्यों के लिए इसे बढ़ा दिया गया है। ऐसे में मतदाताओं के लिए यह जानना जरूरी है:
· ड्राफ्ट सूची जारी होगी: पश्चिम बंगाल की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 16 दिसंबर, 2025 को जारी की जाएगी।
· नाम कैसे चेक करें: मतदाता चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट voters.eci.gov.in पर जाकर “Search Your Name in Draft Roll” विकल्प पर क्लिक कर अपना नाम चेक कर सकते हैं।
· सुधार का मौका: यदि किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं है या विवरण में त्रुटि है, तो वे तय समय सीमा के भीतर आपत्ति या दावा दर्ज करा सकते हैं।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में SIR
पश्चिम बंगाल अकेला राज्य नहीं है जहां SIR प्रक्रिया चल रही है। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भी यह प्रक्रिया जारी है। चुनाव आयोग का दावा है कि इसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को सही और अपडेटेड रखना है, ताकि चुनाव निष्पक्ष तरीके से कराए जा सकें।
बिहार में पहले ही SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जहां करीब 47 लाख मतदाताओं के नाम अलग-अलग कारणों से सूची से हटाए गए थे। बिहार के अनुभव के आधार पर, चुनाव आयोग ने अन्य राज्यों को भी विसंगति वाले मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
SIR: आपके सवाल-जवाब
1. SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) आखिर है क्या?
SIR यानीविशेष गहन पुनरीक्षण मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध करने की एक विशेष प्रक्रिया है। इसमें चुनाव आयोग के अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करते हैं, ताकि फर्जी, डुप्लीकेट या अयोग्य नाम सूची से हटाए जा सकें और पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें।
2. अगर मेरे पिता का नाम गलत दर्ज है या अन्य कोई त्रुटि है, तो मुझे क्या करना चाहिए?
चुनाव आयोग नेऐसे मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाने की प्रक्रिया शुरू की है। आपको आधिकारिक नोटिस मिल सकता है। साथ ही, 16 दिसंबर को ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद, आप आधिकारिक वेबसाइट पर अपना नाम चेक कर सकते हैं और त्रुटि होने पर निर्धारित प्रपत्र भरकर सुधार का अनुरोध कर सकते हैं।
3. क्या पश्चिम बंगाल में SIR फॉर्म भरने की तारीख बढ़ाई गई है?
नहीं,चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश सहित छह अन्य राज्यों के लिए तारीख बढ़ाई है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लिए कोई विस्तार नहीं दिया गया है। प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के अनुसार ही जारी है।
4. क्या यह प्रक्रिया केवल पश्चिम बंगाल में चल रही है?
जीनहीं। कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया चल रही है। बिहार में यह प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है, जहां करोड़ों मतदाताओं के फॉर्म सत्यापित किए गए थे।
5. अगर किसी मतदाता का नाम सूची से हटाया जाता है, तो क्या उसे वोट डालने का मौका मिलेगा?
हां।ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद एक निर्धारित समयावधि में, कोई भी मतदाता या राजनीतिक दल दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकता है। यदि कोई पात्र मतदाता छूट गया है या गलती से हटा दिया गया है, तो फॉर्म-6 भरकर अपना नाम दोबारा सूची में जुड़वा सकता है।
Author: ainewsworld