काशी और तमिलनाडु को जोड़ने वाला बड़ा आयोजन, काशी तमिल संगमम 4.0 दिसंबर में

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय दिसंबर 2025 में ‘काशी तमिल संगमम’ (केटीएस) नामक एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन का चौथा संस्करण आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम 2 दिसंबर से शुरू होगा और उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने गहरे रिश्तों को Celebrate करेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विजन से प्रेरित यह कार्यक्रम देश की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का काम करेगा। इसके आयोजन में आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) सहित कई मंत्रालय और सरकारी संस्थान सहयोग कर रहे हैं।

क्या है इस बार की थीम?

इस साल के आयोजन की थीम है – “तमिल सीखें – तमिल करकलम”। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में तमिल भाषा सीखने को बढ़ावा देना है।

कौन लेंगे हिस्सा?

इस कार्यक्रम में तमिलनाडु से 1,400 से ज्यादा लोग हिस्सा लेंगे, जिनमें छात्र, शिक्षक, लेखक, किसान, कारीगर, महिलाएं और आध्यात्मिक विद्वान शामिल हैं। ये सभी प्रतिनिधि 8 दिनों तक वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या का दौरा करेंगे। उनके लिए सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और स्थानीय संस्कृति से जुड़े विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

मुख्य आकर्षण होंगे ये तीन खास पहल:

1. ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान: तमिलनाडु के तेनकासी शहर से एक विशेष यात्रा 2 दिसंबर को शुरू होकर 10 दिसंबर को काशी (वाराणसी) पहुंचेगी। यह यात्रा प्राचीन काल में दोनों क्षेत्रों के बीच के सांस्कृतिक रिश्तों को दर्शाएगी।
2. काशी के स्कूलों में तमिल शिक्षा: ‘तमिल करकलम’ अभियान के तहत लगभग 50 तमिल शिक्षक वाराणसी के स्कूलों में बच्चों को तमिल भाषा सिखाएंगे।
3. तमिलनाडु अध्ययन यात्रा: वाराणसी के 300 कॉलेज छात्रों को तमिलनाडु भेजा जाएगा, जहाँ वे 15 दिनों तक तमिल भाषा और वहाँ की संस्कृति सीखेंगे।

काशी तमिल संगमम का यह आयोजन देश की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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Author: ainewsworld

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