स्वास्थ्य एवं शिक्षा की एक साथ पहुँच ने आदिवासी समुदायों के जीवन में लाया बदलाव

प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाभियान (पीएम-जनमन) के क्रियान्वयन में उत्कृष्ट योगदान के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सम्मानित किया गया है। मंत्रालय के सचिव श्री अनिल मलिक ने जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भारत के माननीय राष्ट्रपति से यह पुरस्कार ग्रहण किया।

यह सम्मान विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) क्षेत्रों में 2,000 से अधिक नए आंगनवाड़ी केंद्रों को सफलतापूर्वक स्थापित और संचालित करने के मंत्रालय के प्रयासों की मान्यता है। इस पहल ने देश के सबसे पिछड़े माने जाने वाले समुदायों तक स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा की पहुँच को मजबूत किया है।

एकीकृत दृष्टिकोण से मिली बड़ी सफलता

पीएम-जनमन की सफलता में एक प्रमुख योगदार रहा है आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का सह-स्थान (Co-location)। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी किए गए दिशा-निर्देश इसी रणनीति को बल देते हैं। इनका उद्देश्य प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) को मजबूत करना है।

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “हमारा प्रयास सकल नामांकन अनुपात और शुद्ध नामांकन अनुपात को एक समान बनाना है ताकि उचित आयु के बच्चे सही कक्षा में आ सकें”। इस एकीकृत मॉडल से बच्चों के लिए ग्रेड 1 में संक्रमण भी आसान हुआ है।

आंगनवाड़ी केंद्र: समुदाय की सेहत और शिक्षा की नींव

आंगनवाड़ी केंद्र, जिसका शाब्दिक अर्थ है “आँगन आश्रय”, भारत सरकार द्वारा 1975 में शुरू किए गए एकीकृत बाल विकास सेवा कार्यक्रम का हिस्सा हैं। ये केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में माँ और बच्चों के लिए बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल, पोषण शिक्षा और पूर्व-विद्यालयीन शिक्षा का प्रमुख आधार हैं।

एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जिम्मेदारियाँ अत्यंत व्यापक हैं, जिनमें गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, पोषण शिक्षा और 3 से 5 साल के बच्चों को पूर्व-स्कूल शिक्षा प्रदान करना शामिल है। ये कार्यकर्ता समुदाय और सरकारी व्यवस्था के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती हैं।

चुनौतियाँ और भविष्य की राह

हालाँकि आंगनवाड़ी व्यवस्था ने ग्रामीण भारत में एक मजबूत सेवा नेटवर्क तैयार किया है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियाँ भी हैं। देश के कई हिस्सों में आंगनवाड़ी केंद्र जर्जर भवनों में चल रहे हैं, जहाँ बच्चों की सुरक्षा खतरे में है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का एक उदाहरण इन चुनौतियों की पुष्टि करता है, जहाँ टूटती दीवारों और छत से टपकते पानी के बीच बच्चों को पढ़ाना और उन्हें पौष्टिक भोजन देना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

इसके अलावा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय और कार्य स्थितियों को लेकर भी चिंताएँ व्यक्त की जाती रही हैं। इन चुनौतियों के बावजूद, सरकार ने हाल के वर्षों में कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी करके एक सकारात्मक पहल की है।

💡 सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य की उम्मीद

पीएम-जनमन के तहत पीवीटीजी क्षेत्रों में खोले गए 2,000 नए आंगनवाड़ी केंद्र न केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि हैं, बल्कि ये दूरदराज के समुदायों में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की रोशनी फैलाने का काम कर रहे हैं। यह पुरस्कार महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की इस प्रतिबद्धता का प्रमाण है कि विकास की मुख्यधारा में सबसे पिछड़े वर्ग को सबसे पहले शामिल किया जाए।

सरकार के इस प्रयास से न केवल वंचित तबके के बच्चों और महिलाओं का जीवन बेहतर हो रहा है, बल्कि देश के समावेशी विकास को एक नई दिशा भी मिल रही है।

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Author: ainewsworld

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