राज्यसभा बहस: राष्ट्रपति मुर्मू के भाषण पर सरकार-विपक्ष में टकराव
संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बुधवार को राज्यसभा में गहन चर्चा हुई। सरकार और विपक्ष ने अपने-अपने तर्क रखे, जिसमें ‘विकसित भारत’ के सपने से लेकर आर्थिक आंकड़ों, बेरोज़गारी और किसानों की आय तक कई मुद्दे शामिल रहे। चर्चा के लिए आवंटित 16 घंटे में से पहले दिन की बहस के बाद संसद को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। चर्चा शुक्रवार को भी जारी रहेगी।
सरकार का पक्ष: ‘सबका साथ’ से ही संभव है विकसित भारत
धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए मनोनीत सदस्य सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में विकसित भारत के लिए एक स्पष्ट और आत्मविश्वासपूर्ण दृष्टि प्रस्तुत की है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनडीए सरकार पहले दिन से ही ‘न्याय’ और गरीबी उन्मूलन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मास्टर ने कहा, “विकसित भारत का निर्माण केवल ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की मूल रणनीति से ही संभव है।” उन्होंने दावा किया कि सरकार पिछले एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफल रही है और लगभग 95 करोड़ भारतीयों को अब सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा है।
प्रस्ताव का समर्थन करते हुए भाजपा सांसद डॉ. मेधा विश्राम कुलकर्णी ने कहा कि राष्ट्रपति के भाषण में भारत की निरंतर प्रगति दर्शाई गई है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और विकास दर बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने जीएसटी राजस्व में वृद्धि और पिछले कुछ वर्षों में तीन करोड़ नए करदाता जुड़ने का उल्लेख किया।
विपक्ष की आलोचना: बेरोज़गारी, किसान और पर्यावरण पर सवाल
विपक्ष ने सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार किसान-विरोधी और मजदूर-विरोधी है। उन्होंने कहा कि देश में बेरोज़गारी घटने के बजाय बढ़ रही है और सरकार के वादों के बावजूद किसानों की आय अभी तक दोगुनी नहीं हुई है।
तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने डिजिटल इंडिया की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि डिजिटल प्रणालियां साइबर धोखाधड़ी और डेटा घोटालों को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण में वृद्धि पर भी चिंता जताई, जिससे देश को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने केंद्रीय बजट में स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए कम धनराशि आवंटित करने पर सरकार की आलोचना की।
स्थानीय मुद्दों से लेकर संस्कृति तक: अन्य दलों के विचार
वहीं, आल इंडिया अन्ना डीएमके के एम थंबीदुरई ने तमिल संस्कृति और भाषा को हमेशा महत्व देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। जनता दल यूनाइटेड के संजय कुमार झा, डीएमके के तिरुचि शिवा और समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव सहित अन्य नेता भी चर्चा में शामिल हुए और अपने-अपने विचार रखे।
इस संसदीय बहस का नज़रिया न केवल भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की आर्थिक दिशा, सामाजिक प्रतिबद्धताओं और राजनीतिक गतिशीलता को दर्शाता है। अमेरिका, यूरोप और अन्य देश भारत की आर्थिक वृद्धि और नीतिगत फैसलों पर नजर बनाए हुए हैं।
Author: ainewsworld