किरेन रिजिजू ने की जनजातीय सशक्तिकरण की पहलों की चर्चा, ‘भारतीय जनजातीय समाज’ पुस्तक का हुआ विमोचन

पहचान और सम्मान सबसे ज़रूरी”: रिजिजू ने रखी जनजातीय सशक्तिकरण की केंद्र सरकार की पहलों पर बात, नई पुस्तक का विमोचन

केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने सोमवार को जनजातीय समुदायों की गरिमा, पहचान और वास्तविक सशक्तिकरण के महत्व पर बल दिया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘भारतीय जनजातीय समाज’ पुस्तक के विमोचन के अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई कई पहलों की जानकारी दी।

श्री रिजिजू ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में जनजातीय समाज का योगदान बहुत बड़ा है, लेकिन दशकों तक उन्हें वह सम्मान नहीं मिला जिसके वे हकदार थे।

जनजातीय गौरव को समर्पित पहल

केंद्रीय मंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समुदायों के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने बताया कि पहली बार जनजातीय समुदायों के तीन सदस्यों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया गया है।

उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय नायकों के योगदान को मान्यता देने पर प्रधानमंत्री के जोर और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ घोषित करने का भी जिक्र किया। इसे देश भर के सभी जनजातीय समुदायों के सम्मान के रूप में बताया गया।

पहचान और सम्मान है सर्वोपरि

श्री रिजिजू ने कहा कि आज़ादी के लगभग 60-70 वर्षों तक जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व ज्यादातर प्रतीकात्मक ही रहा। उन्होंने धर्मांतरण के बहाने सेवा के नाम पर जनजातीय समुदायों के साथ जुड़ने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी प्रथाएं उनकी संस्कृति को कमजोर करती हैं और मूल पहचान को खत्म करती हैं।

“जनजातीय समाज के लिए पहचान और सम्मान सबसे जरूरी हैं,” उन्होंने जोर देकर कहा।

‘भारतीय जनजातीय समाज’ पुस्तक का विमोचन

यह पुस्तक जानी-मानी समाजशास्त्री और शिक्षाविद डॉ. स्वीटी तिवारी ने लिखी है। पुस्तक का पूरा नाम ‘भारतीय जनजातीय समाज (शिक्षित एवं सशक्त भूमिका में आत्मनिर्भरता की ओर)’ है।

डॉ. तिवारी ने कहा कि सबसे मुश्किल समय में भी जनजातीय समाज की लौ कभी धीमी नहीं पड़ी। उन्होंने ‘गंगा-दामोदर तहज़ीब’ का उल्लेख करते हुए कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब के बारे में तो बहुत बात होती है, लेकिन गंगा-दामोदर तहज़ीब के बारे में कम चर्चा होती है।

अतिथियों ने रखे अपने विचार

इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) के अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने जनजातीय समाज से जुड़े समकालीन मुद्दों, नीतिगत हस्तक्षेपों और स्थायी सांस्कृतिक संरक्षण की आवश्यकता पर बात की।

आयोग की सदस्य डॉ. आशा लाकड़ा ने कहा कि पुस्तक के विषय सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के व्यापक ढांचे में हैं।

कार्यक्रम का आयोजन

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का आयोजन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के जनपद संपदा प्रभाग ने अपनी ‘ज्ञानपथ’ श्रृंखला के तहत किया था।

इस अवसर पर वनवासी कल्याण आश्रम के श्री सुरेश कुलकर्णी सहित बड़ी संख्या में विद्वान, शोधकर्ता, विद्यार्थी और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शक उपस्थित थे।

 

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Author: ainewsworld

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