लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने शनिवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन को संबोधित किया। अंतर्मना धार्मिक न्यास और पतंजलि योगपीठ के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस सम्मेलन में उन्होंने योग, ध्यान और स्वदेशी जीवन मूल्यों को राष्ट्र निर्माण और वैश्विक कल्याण के आधार स्तंभ के रूप में रेखांकित किया।

श्री बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि उपवास, योग, ध्यान और स्वदेशी चिंतन पर केंद्रित यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि संयम, आत्मनियंत्रण और जनकल्याण की व्यापक भावना को मूर्त रूप देने का एक मंच है। उन्होंने कहा, “यह वह भावना है जो व्यक्ति के विकास के साथ-साथ समाज में संतुलन, शांति और सद्भाव को मजबूत बनाती है।”
विकसित भारत की यात्रा के लिए आवश्यक हैं आत्मशक्ति और स्वावलंबन
लोकसभा अध्यक्ष ने इस अवसर पर देश की विकास यात्रा में पारंपरिक मूल्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा, “आत्मशक्ति, एकाग्रता और स्वावलंबन जैसे मूल्य विकसित भारत की यात्रा में अत्यंत आवश्यक हैं, और जनमंगल की यह भावना उन्हें नई दिशा प्रदान करती है।” उनके अनुसार, ये सिद्धांत न केवल व्यक्तिगत उत्थान बल्कि सामूहिक प्रगति के भी मार्गदर्शक बन सकते हैं।
श्री बिरला ने संयम, अपरिग्रह और सेवा जैसे सिद्धांतों को जीवन-दृष्टि के रूप में अपनाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि यह विचारधारा लोगों को जनकल्याण के कार्यों को व्यवहार में उतारने की प्रेरणा देती है और एक अधिक संवेदनशील व समृद्ध समाज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करती है।
Author: ainewsworld