रूस-यूक्रेन युद्ध: अमेरिकी मध्यस्थता में 3 फरवरी से अबू धाबी में दूसरे दौर की वार्ता, ट्रंप बोले- ‘समझौते के करीब’

अबू धाबी में फिर जुटेंगे रूस-यूक्रेन, अमेरिका की मध्यस्थता में आज से दोबारा शांति वार्ता

शांति के लिए यह नया दौर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहली त्रिपक्षीय बैठक के बाद ही रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने पर सहमति जताई थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में अमेरिकी मध्यस्थता वाली शांति वार्ता का एक नया और महत्वपूर्ण दौर आज, 3 फरवरी 2026 से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की राजधानी अबू धाबी में शुरू हो रहा है। यह वार्ता पिछले सप्ताह 23-24 जनवरी को हुई पहली ऐतिहासिक त्रिपक्षीय बैठक के बाद दूसरा आमना-सामना है, जिसमें तीनों देशों के प्रतिनिधि सीधे बातचीत कर रहे थे।

इस बैठक की पृष्ठभूमि में युद्धरत दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वयं स्वीकार किया है कि “ज़ेलेंस्की और पुतिन एक-दूसरे से नफरत करते हैं, और यह शांति प्रयासों को बहुत मुश्किल बनाता है”। इसके बावजूद, ट्रंप ने यह भी कहा है कि उन्हें लगता है कि वे “समझौता होने के बहुत करीब” हैं।

🕊️ वार्ता की प्रमुख बातें: एक नजर में

· बैठक का दूसरा दौर: अबू धाबी में 3 फरवरी से शुरू।
· पहली बैठक: 23-24 जनवरी को अबू धाबी में हुई थी, जो तीनों देशों की पहली त्रिपक्षीय वार्ता थी।
· अमेरिकी प्रयास: अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूस के किरिल दिमित्रिएव के साथ “उत्पादक और रचनात्मक” बैठकें की हैं।
· यूक्रेन की तैयारी: राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के मुताबिक, अमेरिका की ओर से सुरक्षा गारंटी का दस्तावेज “100% तैयार” है।
· युद्ध की भयावहता: एक रिपोर्ट के अनुसार, वसंत 2026 तक दोनों देशों के कुल युद्ध हताहतों की संख्या 20 लाख तक पहुंच सकती है।

शांति की राह में अहम मोड़

अमेरिका की सक्रिय भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में सबसे अहम है। अमेरिकी प्रतिनिधि दल ने इस बैठक से पहले ही रूस और यूक्रेन दोनों के साथ अलग-अलग वार्ताएं कीं। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने रूसी समकक्ष किरिल दिमित्रिएव के साथ फ्लोरिडा में हुई मुलाकात को “उत्पादक” बताया। इन बैठकों में अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट और ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर भी शामिल हुए।

एक ठोस प्रगति यह देखने को मिली कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ट्रंप के अनुरोध पर यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर एक सप्ताह के लिए हमले रोकने पर सहमति जताई। ट्रंप ने इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा, “बहुत से लोगों ने कहा था कि फोन करने की जहमत न उठाएं, आपको यह छूट नहीं मिलेगी। और उन्होंने (पुतिन) ऐसा कर दिया”। यूक्रेन ने भी पुष्टि की कि गुरुवार की रात से दोनों पक्षों ने ऊर्जा लक्ष्यों पर हमले नहीं किए हैं।

क्या हैं प्रमुख चुनौतियां और मुद्दे?

यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने माना है कि अबू धाबी में 20-बिंदु वाले अमेरिकी शांति योजना पर चर्चा हुई और “कई समस्याग्रस्त मुद्दे थे, लेकिन अब उनकी संख्या कम हो गई है”। हालांकि, कुछ बुनियादी मतभेद अब भी गहरे हैं:

· क्षेत्रीय संप्रभुता: ज़ेलेंस्की का कहना है कि रूस यूक्रेन को पूर्वी क्षेत्रों को छोड़ने के लिए मजबूर करना चाहता है, जबकि यूक्रेन अपनी क्षेत्रीय अखंडता पर अडिग है।
· रूस की मांगें: रूस ने डोनबास क्षेत्र सहित विवादित इलाकों और यूक्रेन की नाटो सदस्यता जैसे गंभीर मुद्दों पर समाधान की बात कही है।
· युद्ध के बाद की तैयारी: सुरक्षा गारंटी, पुनर्निर्माण और स्थिरता के लिए आवश्यक दस्तावेजों को यूक्रेन ने तैयार बताया है, लेकिन अंतिम समझौते के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी एक बड़ी चुनौती है।

अमेरिका का रुख: धैर्य की सीमा तक?

हालांकि अमेरिका वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध दिख रहा है, लेकिन उसने अपना धैर्य भी जताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि जब तक समझौते के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, अमेरिका कुछ ही दिनों में अपनी मध्यस्थता के प्रयास बंद कर सकता है।

रुबियो के मुताबिक, “राष्ट्रपति ट्रंप को अभी भी इन दोनों देशों के बीच समझौता कराने की कोशिश में है, लेकिन दुनिया भर में उनकी कई अन्य प्राथमिकताएं हैं और जब तक प्रगति के संकेत नहीं मिलते, वे आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं”।

आगे की राह क्या है?

इस नई वार्ता के नतीजे पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यदि प्रगति सकारात्मक रही, तो संघर्ष विराम, शांति समझौते और पुनर्निर्माण योजनाओं पर काम आगे बढ़ सकता है। रूस ने ज़ेलेंस्की को मॉस्को में वार्ता के लिए आमंत्रित भी किया है, जिससे आशा की एक किरण दिखती है।

हालांकि, यदि असहमति बनी रहती है, तो युद्ध की भयावहता और बढ़ सकती है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) की एक रिपोर्ट चेतावनी देती है कि वसंत 2026 तक रूस और यूक्रेन के कुल युद्ध हताहतों की संख्या 20 लाख के करीब पहुंच सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2022 से दिसंबर 2025 के बीच रूस को 12 लाख हताहतों (जिनमें 3.25 लाख सैनिक मौतें शामिल हैं) का सामना करना पड़ा है, जबकि यूक्रेन के 5 से 6 लाख हताहत (1.4 लाख सैनिक मौतें) हुए हैं।

निष्कर्षतः, अबू धाबी में हो रही यह वार्ता चार साल से अधिक समय से जारी इस भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक क्षण साबित हो सकती है। पूरा विश्व शांति की उम्मीद से इसके परिणामों की प्रतीक्षा कर रहा है।

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Author: ainewsworld

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