ईरान ने अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर वार्ता फिर से शुरू करने की संभावना पर विचार शुरू किया है। इस कदम से क्षेत्र में बढ़ रहे तनाव में कमी की उम्मीद जगी है।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के साथ लंबे समय से ठप पड़ी परमाणु वार्ता फिर से शुरू करने की संभावनाओं पर ‘गंभीरता से विचार’ करना शुरू कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि तेहरान वार्ता के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा कर रहा है, क्योंकि देश पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को जल्द से जल्द हटाना उसके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अमेरिका की तीन मुख्य शर्तें, ईरान ने कहा- ‘संप्रभुता का उल्लंघन’
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका ने वार्ता फिर से शुरू करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं:
1. ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर पूर्ण रोक लगानी होगी।
2. देश के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी रोक लगे।
3. क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न गुटों को ईरानी समर्थन बंद किया जाए।
हालांकि, ईरान ने इन मांगों को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता में दखल बताते हुए स्पष्ट तौर पर खारिज कर दिया है। इससे दोनों देशों के बीच मतभेद साफ दिख रहे हैं।
नौसेना बेड़े की तैनाती से बढ़ा तनाव
पिछले महीने ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा के बाद से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इसी कड़ी में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तट के निकट अमेरिकी नौसेना का एक बेड़ा तैनात करने का आदेश दिया था। ट्रंप लगातार ईरान से परमाणु रियायतें देने की मांग करते रहे हैं। इस सैन्य तैनाती को क्षेत्र में और अशांति फैलने की आशंका के तौर पर देखा जा रहा है।
तुर्की में हो सकती है उच्चस्तरीय बैठक
इस बीच, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी और एक पश्चिमी राजनयिक ने एक्सक्लूसिव जानकारी दी है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के उप विदेश मंत्री अब्बास अरागची आने वाले कुछ दिनों में तुर्की में गुप्त वार्ता कर सकते हैं। यह बैठक द्विपक्षीय बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम कदम हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस वार्ता पर
यह विकास न सिर्फ भारत, बल्कि अमेरिका, रूस, यूक्रेन और पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। ईरान परमाणु समझौता (JCPOA) दुनिया की एक प्रमुख सुरक्षा चिंता रहा है। अगर वार्ता सफल होती है, तो इससे मध्य पूर्व में शांति की संभावना बढ़ेगी और वैश्विक तेल बाजार को भी स्थिरता मिल सकती है। विफलता की स्थिति में तनाव और बढ़ने के आसार हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच यह नई कूटनीतिक हलचल एक नए अध्याय की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास और कड़ी शर्तों को देखते हुए राह आसान नहीं दिखती। पूरी दुनिया की नजर अब तुर्की में होने वाली संभावित बैठक पर टिकी हुई है।
Author: ainewsworld