फ्रांस ने उठाया बड़ा कदम: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का विधेयक पारित

फ्रांस ने उठाया बड़ा कदम: 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का विधेयक पारित

डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर फ्रांस ने ऐतिहासिक फैसला लिया है। फ्रांस की संसद ने 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाले एक विधेयक को बृहस्पतिवार रात भारी बहुमत से पारित कर दिया। यह विधेयक 130 मतों के पक्ष में और मात्र 21 मतों के विपक्ष में पारित हुआ।

इस विधेयक को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शीघ्र पारित करने का अनुरोध किया था। अब इस पर सीनेट में चर्चा होगी। प्रस्ताव के अनुसार, यह प्रतिबंध अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से प्रभावी हो जाएगा। इसका मकसद किशोरों को सोशल मीडिया के संभावित नुकसान, जैसे साइबर बुलिंग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और डेटा गोपनीयता के जोखिमों से बचाना है।

यूरोपीय संघ के डिजिटल कानूनों के अनुरूप

यह विधेयक यूरोपीय संघ के सख्त डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) के अनुरूप बनाया गया है, जो ऑनलाइन उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा और अधिकारों को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस कानून के तहत प्लेटफॉर्म्स को हानिकारक सामग्री को हटाने और अपने एल्गोरिदम पारदर्शी बनाने के लिए बाध्य किया जाता है।

वैश्विक चलन में शामिल होता फ्रांस

फ्रांस इस मामले में अकेला नहीं है। ऑस्ट्रेलिया पिछले साल दिसंबर में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू करने वाला पहला देश बन गया था। वहीं, ब्रिटेन भी इसी तरह के प्रतिबंधों पर सक्रिय चर्चा कर रहा है। अमेरिका के कई राज्यों में भी बच्चों के ऑनलाइन सुरक्षा कानूनों पर विचार चल रहा है।

विशेषज्ञों की राय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

बाल मनोवैज्ञानिक और डिजिटल विशेषज्ञ इस कदम का स्वागत करते हुए इसे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक सुरक्षा कवच बता रहे हैं। हालांकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि प्रतिबंध के बजाय डिजिटल साक्षरता और अभिभावकीय नियंत्रण को बढ़ावा देना अधिक प्रभावी हो सकता है।

जर्मनी, जापान और चीन जैसे देश भी अपने-अपने स्तर पर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को विनियमित करने के उपायों पर काम कर रहे हैं। रूस ने भी पहले ही कुछ प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगा रखा है।

क्या होगा प्रभाव?

इस कानून के लागू होने के बाद, स्नैपचैट, टिकटॉक, इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म्स को फ्रांस में उपयोगकर्ताओं की आयु सत्यापन के लिए मजबूत तंत्र लागू करने होंगे। प्लेटफॉर्म्स को जुर्माने का भी सामना करना पड़ सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस का यह कदम यूरोप और दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है।

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Author: ainewsworld

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