ब्रिटेन की संसद से वंशानुगत सांसदों की विदाई: हाउस ऑफ लॉर्ड्स में 800 साल पुरानी परंपरा का अंत

ब्रिटेन की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। ब्रिटिश संसद के ऊपरी सदन (हाउस ऑफ लॉर्ड्स) ने शेष बचे सभी वंशानुगत सांसदों (Hereditary Peers) को हटाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के साथ ही उस व्यवस्था का अंत हो गया, जिसमें कुलीन वर्ग के लोगों को जन्म से ही संसद में सीट पाने का अधिकार मिल जाता था।

क्या है पूरा मामला?

ब्रिटेन की संसद ने ‘वंशानुगत पीयर्स विधेयक’ (Hereditary Peers Bill) पारित कर दिया है। यह विधेयक हाउस ऑफ लॉर्ड्स से बचे हुए 92 वंशानुगत सांसदों को हटाने का मार्ग प्रशस्त करता है। गौरतलब है कि 25 साल पहले 1999 में शुरू किए गए सुधारों के तहत अधिकांश वंशानुगत सांसदों को हटा दिया गया था, लेकिन समझौते के तहत 92 सदस्यों को अस्थायी रूप से बनाए रखा गया था। अब इस नए विधेयक से उन 92 सदस्यों की भी सदस्यता समाप्त हो जाएगी।

सरकार का तर्क: जन्म से नहीं, योग्यता से मिले सीट

प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार ने इस विधेयक को उच्च सदन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि 21वीं सदी में किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए संसद का सदस्य नहीं होना चाहिए क्योंकि उसके पूर्वज सैकड़ों साल पहले राजा के प्रिय थे। सरकार का मानना है कि लोकतंत्र में जन्म के आधार पर कोई विशेषाधिकार नहीं मिलना चाहिए।

कैसे काम करता है हाउस ऑफ लॉर्ड्स?

ब्रिटिश संसद के ऊपरी सदन हाउस ऑफ लॉर्ड्स में फिलहाल कुल 800 सदस्य हैं। आइए समझते हैं कि यह सदन कैसे काम करता है और अब इसकी संरचना क्या होगी:

· जीवन सदस्य (Life Peers): अधिकांश सदस्य (लगभग 670) ये होते हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री की सलाह पर राजा या रानी द्वारा नियुक्त किया जाता है। ये नियुक्तियां राजनीतिक दलों या एक स्वतंत्र आयोग की सिफारिश पर आजीवन के लिए होती हैं। इनकी सीट वंशानुगत नहीं होती।

· बिशप: चर्च ऑफ इंग्लैंड के 26 वरिष्ठ बिशप भी इस सदन के सदस्य होते हैं।

· वंशानुगत सदस्य: पुरानी व्यवस्था में कुछ सदस्य ऐसे होते थे, जिनकी सीट उन्हें विरासत में मिलती थी। अब इस विधेयक के बाद यह श्रेणी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

क्यों है यह खबर अहम?

यह फैसला न सिर्फ ब्रिटेन, बल्कि दुनिया भर के उन देशों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां आज भी राजतंत्र या कुलीन वर्ग की झलक मिलती है। यह इस बात का प्रतीक है कि कैसे पुरानी परंपराओं को आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ ढाला जा रहा है। अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ईरान जैसे देशों में भी इस तरह के सुधारों और राजनीतिक संरचनाओं को लेकर बहस होती रहती है। इस फैसले से एक संदेश जाता है कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए, न कि जन्म से मिले अधिकार।

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Author: ainewsworld

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