भारत-अमेरिका ऐतिहासिक ‘पैक्स सिलिका’ समझौते पर हस्ताक्षर: सेमीकंडक्टर और AI के क्षेत्र में नई क्रांति

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करते हुए आज नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान ऐतिहासिक ‘पैक्स सिलिका घोषणापत्र’ पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उद्योग की दिशा भी तय करेगा।
इस ऐतिहासिक समझौते पर दोनों देशों के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी व्हाइट हाउस में सूचना एवं प्रौद्योगिकी नीति कार्यालय के निदेशक माइकल क्रॉस्टसिओस मुख्य रूप से मौजूद थे।
क्या है ‘पैक्स सिलिका’ घोषणापत्र?
‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) का शाब्दिक अर्थ है ‘सिलिकॉन शांति’। यह समझौता महत्वपूर्ण खनिजों, सेमीकंडक्टर (चिप) उत्पादन और अगली पीढ़ी की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकियों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक ढांचा है।
इसका मुख्य उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करते हुए एक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। यह समझौता मुक्त बाजारों को सशक्त बनाते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर केंद्रित है।
अश्विनी वैष्णव: भारत बनेगा सेमीकंडक्टर का वैश्विक केंद्र
समझौते पर हस्ताक्षर के बाद केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का लक्ष्य सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में विश्व का अग्रणी देश बनना है। उन्होंने बताया कि भारतीय इंजीनियर पहले से ही दुनिया की सबसे जटिल दो नैनोमीटर चिप्स को डिजाइन कर रहे हैं।
श्री वैष्णव ने कहा, “आने वाले समय में सेमीकंडक्टर उद्योग को 10 लाख से अधिक प्रतिभाशाली इंजीनियरों की आवश्यकता होगी, और यह जरूरत हमारे देश के भीतर ही पूरी होगी।” उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान में देशभर के 315 विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र चिप डिजाइनिंग जैसे अत्याधुनिक कार्यों में जुटे हुए हैं, जो भारत की प्रतिभा का परिचायक है।
अमेरिकी राजदूत बोले: बाध्यकारी निर्भरताओं से मुक्ति
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ का उद्देश्य बाध्यकारी निर्भरताओं (Coercive Dependencies) को विश्वसनीय औद्योगिक साझेदारियों से बदलना है। उन्होंने कहा कि यह समझौता न केवल व्यापार बल्कि रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए द्वार खोलेगा।
राजदूत गोर ने कहा, “शांति से ही शक्ति प्राप्त होती है। यह साझेदारी वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय और नैतिक एआई (Artificial Intelligence) को आगे बढ़ाने का प्रयास करती है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि यह गठबंधन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करते हुए तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री: यह सिर्फ समझौता नहीं, साझा भविष्य का रोडमैप है
अमेरिका के विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने इस अवसर पर कहा कि ‘पैक्स सिलिका’ घोषणापत्र केवल एक औपचारिक समझौता भर नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के साझा भविष्य का रोडमैप है। उन्होंने कहा कि यह समझौता नवाचार और साझेदारी के माध्यम से भविष्य के निर्माण की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
श्री हेलबर्ग ने उभरती प्रौद्योगिकियों में भारत-अमेरिका के बढ़ते सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति नवाचारी दृष्टिकोण की पुष्टि कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय ने इसे बताया बड़ी उपलब्धि
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को दोनों देशों के बीच एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया है। मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट कर कहा कि पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर आपूर्ति श्रृंखला को व्यवस्थित रखने, महत्वपूर्ण खनिजों और अगली पीढ़ी के एआई नवाचार के प्रति साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
क्यों है यह समझौता खास?
· आपूर्ति श्रृंखला में सुरक्षा: वैश्विक सेमीकंडक्टर संकट के बीच यह समझौता भारत और अमेरिका को एक मजबूत और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने में मदद करेगा।
· एआई में नेतृत्व: दोनों देश मिलकर नैतिक और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक मानक विकसित करेंगे।
· महत्वपूर्ण खनिज: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए आवश्यक दुर्लभ खनिजों की खोज और प्रसंस्करण में सहयोग बढ़ेगा।
· रोजगार के अवसर: इस समझौते से भारत में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में लाखों की संख्या में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
‘पैक्स सिलिका’ समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है। यह सिर्फ एक व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि 21वीं सदी की तकनीकी दुनिया की दिशा तय करने वाली एक रणनीतिक साझेदारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र मिलकर वैश्विक तकनीकी परिदृश्य को नया आकार देने में सफल होंगे।
Author: ainewsworld