यूक्रेन संघर्ष पर वार्ता की नई उम्मीद, अबू धाबी में रूस-यूक्रेन-अमेरिका के बीच उच्चस्तरीय बैठक शुरू
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। युद्ध विराम पर चर्चा के लिए दूसरे दौर की त्रिपक्षीय वार्ता गुरुवार से संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में शुरू हो गई है। इस वार्ता में अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका में है और इसका उद्देश्य चार साल से अधिक समय से जारी इस संघर्ष को शांतिपूर्वक समाप्त करने की संभावनाएं तलाशना है।
वार्ता में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि
इस दो दिवसीय उच्चस्तरीय वार्ता में तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं:
· यूक्रेन का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद के सचिव रुस्तम उमेरोफ कर रहे हैं।
· रूस की टीम का नेतृत्व सैन्य खुफिया विभाग के प्रमुख इगोर कोस्त्युकोफ कर रहे हैं।
· अमेरिका की ओर से वरिष्ठ सलाहकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर वार्ता प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं।
तनावपूर्ण माहौल में शुरू हुई वार्ता
यह वार्ता ऐसे समय में शुरू हुई है जब यूक्रेनी शहरों पर रूस के ड्रोन और मिसाइल हमले तेज हुए हैं। हाल के दिनों में रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को विशेष तौर पर निशाना बनाया है, जिससे देश के कई हिस्सों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने बुधवार को आरोप लगाया कि रूस ने बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर दबाव बनाने का आह्वान किया है।
वहीं, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोफ ने स्पष्ट किया है कि जब तक यूक्रेन रूस की मांगों को नहीं मान लेता, तब तक “विशेष सैन्य अभियान” जारी रहेगा। रूस की प्रमुख मांगों में यूक्रेन का नाटो में शामिल न होना और पूर्वी यूक्रेन के कुछ इलाकों पर रूसी अधिकार को मान्यता शामिल है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और अपेक्षाएं
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अबू धाबी वार्ता युद्ध विराम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। संयुक्त अरब अमीरात ने पहले भी अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में सक्रिय भूमिका निभाई है और यह तटस्थ स्थल के रूप में उभरा है।
यूरोपीय संघ और नाटो ने इस वार्ता का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही रूस पर यूक्रेन पर हमले तुरंत रोकने का दबाव भी बनाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि वह “टिकाऊ और न्यायसंगत शांति” के लिए प्रतिबद्ध है।
भारत की भूमिका और रुख
भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर लगातार संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाने की वकालत की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “यह युग युद्ध का नहीं है” कहकर शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया है। भारत ने मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ दोनों पक्षों से बातचीत जारी रखने का आग्रह किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अबू धाबी वार्ता में प्रगति होने पर भारत जैसे तटस्थ देश संघर्ष समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की राह
इस वार्ता के सफल होने से न केवल यूरोप बल्कि पूरी दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद है। युद्ध के कारण वैश्विक खाद्य और ऊर्जा संकट गहराया है, जिससे विकासशील देशों सहित पूरी मानवता प्रभावित हुई है।
वार्ता के परिणाम पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। सफलता मिलने पर यह न केवल यूक्रेन और रूस के लिए, बल्कि विश्व शांति और स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा.
Author: ainewsworld