अबू धाबी में शुरू हो रहा है रूस-यूक्रेन शांति वार्ता का नया दौर, अमेरिकी मध्यस्थता में तलाशा जा रहा है युद्ध का अंत, इधर वार्ता से पहले ही यूक्रेन पर बड़ा हमला पढ़िए पूरा समाचार

अबू धाबी में शुरू हो रहा है रूस-यूक्रेन शांति वार्ता का नया दौर, अमेरिकी मध्यस्थता में तलाशा जा रहा है युद्ध का अंत

रूस और यूक्रेन के बीच चार साल से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक नया और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। अमेरिका की मध्यस्थता में होने वाली त्रिपक्षीय शांति वार्ता का नया दौर अबू धाबी में शुरू हो गया है। यह वार्ता मोर्चे पर जारी भयंकर लड़ाई और घातक हमलों के बीच हो रही है।

रूसी क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस वार्ता की पुष्टि करते हुए बताया कि यह बैठक बुधवार और गुरुवार को होगी। वार्ता की तैयारी के तौर पर रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रिएव की रविवार को अमेरिकी अधिकारियों से मियामी, फ्लोरिडा में बैठक भी हुई थी। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने भी कहा है कि वह वार्ता के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल भेज रहे हैं।

अमेरिका की मध्यस्थता में क्या इस बार युद्ध का अंत होगा ?

वार्ता से पहले ही यूक्रेन पर बड़ा हमला

इस वार्ता की पृष्ठभूमि में सैन्य तनाव बना हुआ है। वार्ता से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को रूस ने यूक्रेन पर एक विशाल हमला किया। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के अनुसार, इस हमले में लगभग 450 लंबी दूरी के ड्रोन और 70 मिसाइलें दागी गईं, जिनमें 32 बैलिस्टिक मिसाइलें रिकॉर्ड संख्या में शामिल थीं। इस हमले का प्राथमिक निशाना देश की बिजली ग्रिड संरचना थी, जिससे कम से कम 10 लोग घायल हुए। कीव में हजारों अपार्टमेंट बिल्डिंग्स का हीटिंग सिस्टम ठप हो गया, जबकि रात के समय तापमान शून्य से 20 डिग्री नीचे चला गया था।

वार्ता में मुख्य मुद्दे और चुनौतियाँ

पिछले एक साल से अमेरिका के प्रयासों के बावजूद, दोनों देशों के बीच कुछ मूलभूत मुद्दों पर गतिरोध बना हुआ है। युद्ध को समाप्त करने का मार्ग इन्हीं विवादों के समाधान से होकर गुजरता है:

· यूक्रेनी क्षेत्रों पर नियंत्रण: सबसे बड़ा मुद्दा रूस द्वारा कब्जाए गए यूक्रेनी क्षेत्रों का भविष्य है। रूस, यूक्रेन के पूर्वी औद्योगिक क्षेत्र डोनबास सहित उन इलाकों पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जिन पर उसने कब्जा कर रखा है या जिन्हें वह अब तक नहीं जीत पाया है। यूक्रेन इस माँग को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुका है और अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर किसी समझौते को ‘गैर-व्यवहार्य’ मानता है।
· युद्ध के बाद की सुरक्षा गारंटी: यूक्रेन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी शांति समझौते के बाद उसे पश्चिमी देशों से मजबूत सुरक्षा गारंटी मिले। हालाँकि, रूस ने इस तरह की प्रस्तावित गारंटी के महत्वपूर्ण हिस्सों को ‘अप्रभावी और विचारधारात्मक रूप से शत्रुतापूर्ण’ बताते हुए अस्वीकार कर दिया है। रूस ने स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन में किसी भी विदेशी सैन्य बल की तैनाती उसे ‘विदेशी हस्तक्षेप’ लगेगा और ऐसे बल उसके लिए वैध लक्ष्य होंगे।
· मानवीय कीमत और ऊर्जा युद्ध: युद्ध की मानवीय कीमत चौंका देने वाली है। एक विश्लेषण के अनुसार, दोनों पक्षों के संयुक्त सैन्य हताहतों की संख्या 20 लाख के करीब पहुँच रही है। साथ ही, रूस यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा प्रणाली को निशाना बनाकर नागरिकों पर कठोर सर्दी में मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहा है। रविवार को हुए एक हमले में एक कोयला खदान के श्रमिकों की बस निशाना बनाई गई, जिसमें 12 खनिकों की मौत हो गई।

दुनिया की प्रतिक्रिया और भविष्य की संभावनाएँ

· अमेरिकी रुख: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संघर्ष में ‘शुरुआती प्रगति’ के संकेत देखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि ज़ेलेंस्की और पुतिन के बीच ‘जबरदस्त नफरत’ एक बड़ी बाधा है, लेकिन ‘शायद कुछ अच्छी खबर’ मिल सकती है। ट्रंप प्रशासन के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस वार्ता में भाग ले रहे हैं।
· यूक्रेन और नैटो का समर्थन: यूक्रेन की मदद के लिए पश्चिमी देशों का समर्थन जारी है। नैटो महासचिव मार्क रुट्टे ने हाल ही में कीव का दौरा किया और यूक्रेन को हवाई रक्षा प्रणालियाँ देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “आपकी सुरक्षा हमारी सुरक्षा है। आपकी शांति हमारी शांति है” ।
· भारत और वैश्विक प्रभाव: इस युद्ध का प्रभाव वैश्विक है। ट्रंप प्रशासन द्वारा रूस से तेल आयात रोकने के एक व्यापार समझौते के बाद, भारतीय तेल रिफाइनरियों को रूसी तेल डील पूरी करने के लिए एक ‘वाइंड-डाउन’ अवधि की आवश्यकता होगी। यह दर्शाता है कि यह संघर्ष आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को कैसे प्रभावित कर रहा है।

रूसी प्रवक्ता पेस्कोव ने इन वार्ताओं को ‘बहुत जटिल’ बताया है। उनके अनुसार, कुछ मुद्दों पर सामान्य जमीन ढूँढना आसान हो गया है, जबकि कुछ अन्य पर यह अब भी मुश्किल है। चार साल के विनाशकारी युद्ध के बाद, अबू धाबी की इस वार्ता में निहित है नाजुक उम्मीद। यह देखना बाकी है कि क्या यह वार्ता यूरोप के इस सबसे घातक संघर्षों में से एक का अंत लाने की दिशा में एक वास्तविक मोड़ साबित होगी ?

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Author: ainewsworld

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