भारत की अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक उछाल: 2025-26 में जीडीपी 7.4% की रिकॉर्ड वृद्धि के साथ, वैश्विक निवेशकों की नजरें टिकीं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट 2026-27, घोषणा की – मजबूत घरेलू मांग और रेटिंग उन्नयन ने बनाई मजबूत नींव
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक मजबूत और लचीला प्रदर्शन दर्ज किया है। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश केंद्रीय बजट 2026-27 के अनुसार, देश का वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आगे बढ़ा है, जबकि नॉमिनल जीडीपी विकास दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वृद्धि शक्तिशाली घरेलू मांग, बुनियादी ढांचागत सुधारों और एक स्थिर आर्थिक माहौल के कारण संभव हुई है।
वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कहा कि देश ने इस दौरान तीन प्रमुख रेटिंग हासिल की हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की विश्वसनीयता को दर्शाता है। मुद्रास्फीति नियंत्रण में रही और निजी निवेश, श्रम बाजार सुधार, डिजिटल परिवर्तन एवं पूंजी निवेश में वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मुख्य भूमिका निभाई।
वृहद आर्थिक संकेतक: सेवा क्षेत्र रहा विकास का इंजन
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के पहले अग्रिम अनुमानों के मुताबिक:
· जीडीपी विकास दर: वास्तविक जीडीपी वृद्धि 7.4% अनुमानित।
· सेवा क्षेत्र: 9.1% के विस्तार के साथ विकास का प्रमुख चालक।
· विनिर्माण एवं निर्माण: 7% की स्वस्थ वृद्धि दर्ज।
· कृषि क्षेत्र: 3.1% की बढ़ोतरी का अनुमान।
अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए, बजट में नॉमिनल जीडीपी विकास दर 10% रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है, जो एक मजबूत आर्थिक संकेत है।
उपभोग और निवेश: घरेलू मांग में ऐतिहासिक वृद्धि
आर्थिक विकास का केंद्र बिंदु घरेलू मांग रही।
· निजी उपभोग (PFCE): जीडीपी के 61.5% हिस्सेदारी के साथ, इसमें 7% की बढ़ोतरी का अनुमान है, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे अधिक है।
· सरकारी उपभोग व्यय: वित्त वर्ष 2026 में 5.2% की वृद्धि का अनुमान, जो पिछले वर्ष के 2.3% से अधिक है।
· डिजिटल साक्ष्य: यूपीआई लेनदेन, हवाई व रेल यातायात और ई-वे बिलों में वृद्धि से शहरी व ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में उपभोग की मजबूत गति स्पष्ट है।
· निवेश गतिविधि: सकल स्थाई पूंजी निर्माण (GFCF) वित्त वर्ष 2026 में 7.8% बढ़कर मजबूत हुआ है, जो पिछले एक दशक से जीडीपी के 30% के आसपास स्थिर बना हुआ है।
बाहरी क्षेत्र: वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत प्रदर्शन
वैश्विक मंदी और संरक्षणवादी नीतियों के बीच भारत का बाह्य क्षेत्र दृढ़ता से खड़ा रहा।
· निर्यात: वस्तु व सेवा निर्यात मिलाकर वित्त वर्ष 2025 में 825.3 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंचा। अमेरिका द्वारा कुछ उत्पादों पर शुल्क लगाए जाने के बावजूद, अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान वस्त्र निर्यात 2.4% और सेवा निर्यात 6.5% बढ़ा।
· विदेशी निवेश (FDI): वित्त वर्ष 2025 में 81.0 अरब अमरीकी डॉलर का रिकॉर्ड प्रवाह दर्ज किया गया, जो वित्त वर्ष 2026 की पहली सात महीनों में और मजबूत हुआ।
· चालू खाता घाटा: सुधारते हुए वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में जीडीपी के 0.8% पर आ गया, जो पिछले वर्ष के 1.3% से कम है।
राजकोषीय अनुशासन: घाटे को नियंत्रित रखने का संकल्प
बजट 2026-27 मध्यम अवधि के राजकोषीय समेकन के मार्ग को जारी रखता है।
· राजकोषीय घाटा: वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इसे जीडीपी के 4.5% पर रखने का लक्ष्य है, जो एक अनुशासित दृष्टिकोण दर्शाता है।
· केंद्रीय ऋण: सरकार का लक्ष्य केंद्र सरकार के ऋण को क्रमिक रूप से कम करना है।
· कर राजस्व: वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल कर राजस्व 44.04 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो पिछले वर्ष से 8% अधिक है। प्रत्यक्ष कर इसका मुख्य आधार बने हुए हैं।
राज्यों को मजबूती: वित्त आयोग की सिफारिशें लागू
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए, केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ करों में 41% हिस्सेदारी जारी रखी है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों में राज्यों को करों में हिस्सेदारी और वित्त आयोग अनुदान मिलाकर कुल 16.56 लाख करोड़ रुपये का संसाधन स्थानांतरण प्रस्तावित है, जो सहकारी संघवाद को मजबूत करता है।
वैश्विक प्रभाव: अमेरिका, चीन, जापान सहित दुनिया के लिए संदेश
भारत का यह मजबूत आर्थिक प्रदर्शन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। जहां कई विकसित देश मंदी की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत का 7.4% की दर से विकास चीन से आगे और विश्व में सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था का दर्जा दर्शाता है। अमेरिका और यूरोप के निवेशकों के लिए भारत एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है, जैसा कि रिकॉर्ड एफडीआई प्रवाह से स्पष्ट है।
रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व (सऊदी अरब सहित) में तनाव के कारण उत्पन्न वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच, भारत एक स्थिर और विकासोन्मुख बाजार के रूप में उभरा है। जापान और अन्य एशियाई देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे।
भारत के भविष्य की ओर एक मजबूत कदम
केंद्रीय बजट 2026-27 न केवल वर्तमान आर्थिक मजबूती को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि भविष्य के लिए एक रोडमैप भी प्रस्तुत करता है। बुनियादी ढांचे पर जोर, डिजिटलीकरण को बढ़ावा, निजी निवेश को प्रोत्साहन और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने के प्रयास, भारत को एक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में अहम कदम हैं। यह बजट देश को नई ऊर्जा देगा और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका को और भी सशक्त बनाएगा।
Author: ainewsworld