दावोस में भारत की तूती बोलेगी: 100 से अधिक सीईओ और मंत्रिमंडल WEF सम्मेलन में लेंगे हिस्सा

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को आकार देने वाले सबसे प्रतिष्ठित मंच, विश्व आर्थिक मंच (WEF) का 56वां वार्षिक सम्मेलन आज से स्विट्जरलैंड के दावोस में शुरू हो गया है। इस वर्ष का सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें भारत की मजबूत और रिकॉर्ड तादाद में उपस्थिति दर्ज हो रही है। 100 से अधिक भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) और एक शीर्ष सरकारी प्रतिनिधिमंडल के साथ, भारत ‘विकास का इंजन’ बनने की अपनी भूमिका को रेखांकित करने के लिए तैयार है।

इस पांच दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर के 3,000 से अधिक नेता, उद्योगपति और विचारक हिस्सा ले रहे हैं। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (रेलवे, संचार), प्रल्हाद जोशी (कोयला, खान) और के. राममोहन नायडू (सिविल एविएशन) जैसे वरिष्ठ मंत्रियों के शामिल होने की पुष्टि है। यह मंत्रिमंडल वैश्विक निवेशकों के सामने भारत की नीतिगत स्थिरता और रिफॉर्म-उन्मुख ग्रोथ की कहानी पेश करेगा।

राज्यों की ‘इन्वेस्टमेंट पिच’ पर नजर:

इस वर्ष का एक उल्लेखनीय पहलू भारतीय राज्यों की सक्रिय भागीदारी है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम और झारखंड के मुख्यमंत्री दावोस पहुंचे हैं और वहां वैश्विक निवेशकों को अपने-अपने राज्यों में व्यापार के अवसरों से रूबरू कराएंगे। इन राज्यों की अलग-अलग पहचान – जैसे महाराष्ट्र का वित्तीय केंद्र, असम की लॉजिस्टिक्स क्षमता, या मध्य प्रदेश का कृषि-उद्योग – निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र होंगे।

इसके अलावा, कर्नाटक (जिसकी राजधानी बेंगलुरु भारत की सिलिकॉन वैली है), उत्तर प्रदेश, केरल और तेलंगाना सहित कई राज्यों ने दावोस में अपने पवेलियन लगाए हैं। ये पवेलियन राज्य-विशिष्ट उद्योगों, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश के अनुकूल माहौल को प्रदर्शित करने के लिए एक सीधा मंच तैयार करेंगे।

वैश्विक प्रासंगिकता और भारत का एजेंडा:

विश्व आर्थिक मंच का यह सम्मेलन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव और सतत विकास जैसे विषयों पर केंद्रित है। भारतीय प्रतिनिधि न केवल वैश्विक चर्चाओं में अपना दृष्टिकोण साझा करेंगे, बल्कि देश को एक विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला केंद्र, डिजिटल प्रौद्योगिकी का नेता और हरित ऊर्जा संक्रमण में एक प्रमुख भागीदार के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेंगे।

अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और कॉर्पोरेट नेताओं की नजर इस बात पर होगी कि भारत कैसे वैश्विक मंदी के खतरों के बीच भी अपनी विकास दर को मजबूत बनाए रखने और दुनिया के लिए एक बाजार व निवेश गंतव्य के रूप में अपनी पेशकशों को बढ़ाने की योजना बना रहा है।

दावोस 2026 में भारत की भव्य उपस्थिति एक स्पष्ट संकेत है कि देश वैश्विक मेज पर अपनी आवाज और प्रभाव बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार और उद्योग जगत के बीच इस सामंजस्यपूर्ण भागीदारी से यह संदेश जाएगा कि भारत न केवल आर्थिक विकास की अपनी कहानी साझा करने, बल्कि वैश्विक समाधानों को आकार देने में भी रुचि रखता है।

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Author: ainewsworld

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