राष्ट्रीय सम्मेलन में अरावली संरक्षण पर विचार साझा करते पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
अरावली संरक्षण को लेकर केंद्र सरकार प्रतिबद्ध, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दोहराया संकल्प
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अतिक्रमण और अवैध खनन जैसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
नई दिल्ली में अरावली परिदृश्य के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि अरावली क्षेत्र की लगभग 97 किलोमीटर लंबी राजस्व भूमि को स्थायी संरक्षित वन घोषित किया गया है। इस कदम से क्षेत्र की जैव विविधता को संरक्षित करने और पर्यावरणीय क्षति को रोकने में मदद मिलेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस राष्ट्रीय मिशन का भी उल्लेख किया, जिसके तहत देशभर में करीब 26 करोड़ हेक्टेयर क्षतिग्रस्त भूमि के पुनर्स्थापन का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि यह पहल भारत की पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करती है।
भूपेंद्र यादव ने बताया कि अरावली ग्रीन वॉल परियोजना के अंतर्गत कुल 6 लाख 45 हजार हेक्टेयर खराब भूमि की पहचान की गई है। इनमें से 2 लाख 70 हजार हेक्टेयर भूमि का पुनर्स्थापन कार्य गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों में किया जा रहा है।
उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि विकास की प्रक्रिया को पारिस्थितिकी के साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ाया जाना आवश्यक है। मंत्री ने कहा कि सरकार प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है।