
लोहड़ी की लपटों में सिमटा उत्तर भारत का उत्सव! 🇮🇳 राष्ट्रपति मुर्मु के संदेश के साथ, जानिए कैसे मनाया जा रहा है यह खुशियों भरा फसल पर्व। #Lohri2024 #IndianFestival
उत्तर भारत के विस्तृत खेतों में सरसों के पीले फूल और पकी हुई रबी की फसलों के बीच आज लोहड़ी का पारंपरिक त्योहार उल्लास और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में मनाया जाता है, जो न केवल फसलों के पकने की खुशी का प्रतीक है, बल्कि सामुदायिक एकता और नए सिरे से शुरुआत का संकेत भी देता है।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्र को लोहड़ी के साथ-साथ मकर संक्रांति, पोंगल और माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी त्योहार देश की समृद्ध कृषि परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता में एकता के प्रतीक हैं।
क्या है लोहड़ी का महत्व?
लोहड़ी मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाने वाला एक लोकप्रिय फसल उत्सव है। यह दिन सर्दियों की विदाई और बसंत के आगमन का भी संकेत माना जाता है। इस दिन शाम के समय लोग सार्वजनिक स्थानों या घरों के आंगन में अलाव जलाते हैं। इस अलाव के चारों ओर परिवार और समुदाय के लोग इकट्ठा होते हैं, पारंपरिक लोहड़ी गीत गाते हैं, नाचते हैं और अग्नि में मूंगफली, रेवड़ी, मक्का और तिल के लावा (पॉपकॉर्न) की आहुति देते हैं, जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने दी किसानों के परिश्रम को मान्यता
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा, “ये त्योहार हमारे देश के अथक परिश्रमी किसानों के समर्पण को मान्यता प्रदान करने का अवसर हैं, जो राष्ट्र को अन्न देते हैं।” उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मनाए जाने वाले ये उत्सव प्रकृति के प्रति हमारी सामूहिक कृतज्ञता का प्रतिनिधित्व करते हैं और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा एकजुटता की भावना को और मजबूत करते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ में लोहड़ी
लोहड़ी जैसे फसल उत्सव विश्व भर की संस्कृतियों में एक सामान्य तत्व हैं। यह त्योहार उसी भावना को दर्शाता है जो अमेरिका में थैंक्सगिविंग, यूरोप में विभिन्न फसल उत्सवों, या जापान के निईनामे-साई (अनाज चढ़ाने का उत्सव) में देखी जाती है – यानी प्रकृति की उदारता के प्रति आभार और सामुदायिक बंधनों का सुदृढ़ीकरण।
कैसे मनाते हैं लोहड़ी?
· अलाव (बॉनफायर): त्योहार की रात का केंद्र बिंदु।
· पारंपरिक भोजन: सरसों का साग और मक्के की रोटी, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली और तिल के बने व्यंजन।
· गीत और नृत्य: विशेष रूप से पंजाबी लोक नृत्य भांगड़ा और गिद्दा।
· मुंडन संस्कार: कई परिवारों में नवजात बच्चों का पहला लोहड़ी या नए विवाहित जोड़ों की पहली लोहड़ी विशेष रूप से मनाई जाती है।
यह त्योहार न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया भर में फैले प्रवासी भारतीय समुदायों द्वारा भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का एक तरीका बनाता है।
Author: ainewsworld