
केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय में पीएम-युवा 3.0 (प्रधानमंत्री युवा लेखक मार्गदर्शन योजना) के तहत चयनित 43 युवा लेखकों के साथ संवादात्मक बैठक आयोजित की। इस दौरान युवा लेखकों ने अपनी आगामी पुस्तकों के विषयों पर चर्चा की।
मेंटरशिप का भरपूर लाभ उठाने का आह्वान
इस कार्यक्रम के दौरान, युवा लेखकों ने 6 महीने के मेंटरशिप कार्यक्रम के तहत लिखी जा रही अपनी किताबों का संक्षिप्त विवरण साझा किया। श्री प्रधान ने सभी चयनित लेखकों को बधाई देते हुए उन्हें सार्थक और प्रेरक पुस्तकें लिखने के लिए मेंटरशिप अवधि का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि ऐसी पुस्तकें देश के युवाओं को पढ़ने, लिखने और ज्ञान से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगी।
शोध संसाधनों तक पहुंच पर हुआ जोर
केंद्रीय मंत्री ने लेखकों के लिए शोध सामग्री तक आसान पहुंच के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट (एनबीटी) को निर्देश दिया कि लेखकों को भौतिक और डिजिटल दोनों प्रकार के संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ (ओएनओएस) पहल के तहत भी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों से मिलेगा सहयोग
लेखकों के अकादमिक और शोध कार्यों को मजबूती प्रदान करने के लिए श्री प्रधान ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि चयनित युवा लेखकों को उनके संबंधित विषय क्षेत्रों के केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध किया जाए, ताकि वे बेहतर ढंग से अपनी पुस्तकों का निर्माण कर सकें।
देश की विविधता को दर्शाते हैं युवा लेखक: प्रधान
युवा लेखकों से हुई इस बातचीत पर खुशी जताते हुए श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि इन उभरते लेखकों की विविधता देश की विविधता को प्रतिबिंबित करती है। उन्होंने बताया कि युवा लेखक राष्ट्र निर्माण में प्रवासी भारतीयों के योगदान, भारतीय ज्ञान प्रणाली और आधुनिक भारत के निर्माताओं जैसे विषयों पर किताबें लिख रहे हैं। इस सत्र में संस्कृति, प्रौद्योगिकी और राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर भी व्यापक चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि इन युवा लेखकों में देखी गई ऊर्जा, आत्मविश्वास और आकांक्षाओं ने विकसित भारत के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत किया है.
Author: ainewsworld