
“हमने इस मुद्दे पर प्रगति की और प्रधानमंत्री मोदी के साथ इसकी सह-अध्यक्षता की। अगले महीने, मैं इस प्रयास को आगे बढ़ाने के लिए भारत जाऊंगा।” – राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि वह अगले महीने फरवरी 2026 में भारत का दौरा करेंगे। यह यात्रा मुख्य रूप से नई दिल्ली में 19-20 फरवरी को आयोजित होने वाले इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भाग लेने के लिए होगी।
यह शिखर सम्मेलन ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई सम्मेलन होगा, जिससे भारत को अंतर्राष्ट्रीय एआई नियमों को आकार देने में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा।
सम्मेलन का महत्व और संरचना
इस शिखर सम्मेलन की घोषणा स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल फ्रांस एआई एक्शन समिट के दौरान की थी, जिसकी सह-अध्यक्षता उन्होंने और राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त रूप से की थी। यह सम्मेलन केवल चर्चा का मंच नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रगति और मूर्त परिणामों पर केंद्रित है।
शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तीसूत्रों (सूत्रों) पर आधारित है:
· लोग: मानव-केंद्रित एआई जो सांस्कृतिक विविधता का सम्मान करे
· ग्रह: जलवायु लचीलापन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने वाली एआई
· प्रगति: समावेशी विकास और समान अवसरों तक पहुंच के लिए एआई
इन सूत्रों को सात विषयगत चक्रों (कार्य समूहों) के माध्यम से कार्यान्वित किया जाएगा, जिनमें मानव पूंजी, सुरक्षित एआई, विज्ञान और एआई संसाधनों का लोकतंत्रीकरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
रणनीतिक साझेदारी का विस्तार: रक्षा से परे
मैक्रों की यह यात्रा भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के दायरे को रक्षा और अंतरिक्ष से आगे बढ़ाती दिख रही है। द्विपक्षीय एजेंडे में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर सहयोग जैसे नए रणनीतिक क्षेत्र भी शामिल होंगे, जो स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में अपनी फ्रांस यात्रा के दौरान इस साझेदारी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि “बहुध्रुवीयता के लिए प्रतिबद्ध दो राष्ट्रों के रूप में, एक साथ काम करना न केवल हमारे लिए, बल्कि इस स्तर पर वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए भी महत्वपूर्ण है।”
वैश्विक भू-राजनीति में भारत-फ्रांस की भूमिका
दोनों देश वर्तमान में वैश्विक मंचों पर सक्रिय हैं। भारत ने बीआरआईसीएस की अध्यक्षता की, जबकि फ्रांस ने जी7 की अध्यक्षता की, और दोनों जी20 के सदस्य हैं। यह संरेखण उन्हें एआई के क्षेत्र में एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में स्थापित करता है।
एआई संसाधनों और प्रौद्योगिकी का एक बड़ा हिस्सा वर्तमान में अमेरिका और चीन के पास केंद्रित है। ऐसे में, भारत, फ्रांस, जापान जैसे मध्यम शक्ति वाले देशों का सहयोग, एआई प्रौद्योगिकी तक पहुंच को लोकतांत्रित करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सम्मेलन के दौरान दिल्ली का माहौल
· महाशिवरात्रि का पर्व: फरवरी 2026 में, सम्मेलन के ठीक पहले 15 फरवरी, रविवार को महाशिवरात्रि का महत्वपूर्ण हिंदू पर्व मनाया जाएगा। यह दिल्ली में एक सांस्कृतिक और धार्मिक उत्साह का माहौल बना सकता है।
· भारतीय एआई पारिस्थितिकी तंत्र की तैयारी: इस शिखर सम्मेलन की तैयारी के तहत, प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में 12 भारतीय एआई स्टार्टअप्स के प्रमुखों के साथ बैठक की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय एआई मॉडल “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” की भावना को दर्शाएं और नैतिक, निष्पक्ष तथा पारदर्शी हों।
राष्ट्रपति मैक्रों की यह यात्रा नवाचार और वैश्विक स्थिरता पर केंद्रित एक मजबूत रणनीतिक गठबंधन को और गहरा करेगी। यह दर्शाता है कि कैसे प्रौद्योगिकी सहयोग आधुनिक कूटनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है, जिसमें भारत और फ्रांस वैश्विक एजेंडा तय करने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
Author: ainewsworld