विश्व पटल पर भारत की कृषि क्रांति: खाद्य संकट से अग्रणी निर्यातक बनने की प्रेरक यात्रा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज देश के कृषि क्षेत्र की ऐतिहासिक प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत ने खाद्य की कमी वाले देश से, दुनिया के प्रमुख कृषि निर्यातकों में से एक बनने तक की उल्लेखनीय यात्रा पूरी की है। यह बात उन्होंने नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही।

मंत्री चौहान ने इस सफलता में वैश्विक संगठनों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देश ने न केवल खाद्य सुरक्षा हासिल कर ली है, बल्कि अब स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करते हुए पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है।

वैश्विक सहयोग पर जोर

चौहान ने आगे कहा, “भारत अब अन्य देशों के साथ अपने अनुभव और सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों को साझा करने की अच्छी स्थिति में है। साथ ही, हम वैश्विक नवाचारों और सफल मॉडलों से सीखकर कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में पारस्परिक विकास और सहयोग को भी बढ़ावा दे सकते हैं।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रही है। भारत की यह सफलता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल के रूप में देखी जा रही है, जिससे विकासशील देश प्रेरणा ले सकते हैं।

भविष्य की राह

इस बैठक का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय में वृद्धि करने और पूरी आपूर्ति श्रृंखला में टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए नवीन तकनीकों एवं नीतियों पर विचार-विमर्श करना था। भारत के इस रुख से उम्मीद है कि वैश्विक कृषि क्षेत्र में सहयोगात्मक शोध और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को नई गति मिलेगी।

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Author: ainewsworld

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