अमेरिका ने 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से सदस्यता वापस ली, भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाला अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन भी प्रभावित

अमेरिका ने एक बड़े कदम में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकायों और भारत-फ्रांस के संयुक्त नेतृत्व वाले अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) सहित 60 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से अपनी सदस्यता वापस ले ली है। इस निर्णय की घोषणा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर के माध्यम से की गई है।

ट्रम्प ने ‘अमेरिकी हितों के विपरीत अंतर्राष्ट्रीय संगठनों, सम्मेलनों और संधियों से अमेरिका की सदस्यता वापस लेना’ शीर्षक वाले इस आदेश पर कल हस्ताक्षर किए। उन्होंने कहा कि 66 संयुक्त राष्ट्र एवं गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों का सदस्य बने रहना या उन्हें किसी भी प्रकार का समर्थन देना अमेरिका के राष्ट्रीय हितों के अनुरूप नहीं है।

इस आदेश के तहत, सभी कार्यकारी विभागों और एजेंसियों को इन संगठनों से सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया गया है। माना जा रहा है कि यह कदम अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की विदेश नीति को आगे बढ़ाता है।

प्रभावित होने वाले प्रमुख संगठन

प्रभावित होने वाले 66 संगठनों की सूची में 31 संयुक्त राष्ट्र संस्थाएं और 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन शामिल हैं। इनमें निम्नलिखित प्रमुख संस्थाएं हैं:

· अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल, जिसका उद्देश्य सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है। इससे जलवायु परिवर्तन से निपटने की वैश्विक कोशिशों पर प्रभाव पड़ सकता है।
· जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (IPCC): संयुक्त राष्ट्र का वह निकाय जो जलवायु परिवर्तन पर वैज्ञानिक आकलन प्रदान करता है।
· संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों का विभाग (UNDESA): वैश्विक आर्थिक और सामाजिक नीतियों के लिए महत्वपूर्ण।
· यूक्रेन में विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र: यूक्रेन से जुड़ा एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन।

अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और प्रभाव

यह निर्णय वैश्विक सहयोग और बहुपक्षवाद के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन जैसी पहलों पर असर पड़ेगा, जिसमें भारत की अग्रणी भूमिका है। साथ ही, जलवायु परिवर्तन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास जैसे वैश्विक मुद्दों पर बहुपक्षीय प्रयास कमजोर हो सकते हैं।

इस कदम से अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों, जैसे कि ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के साथ-साथ जापान और अन्य देशों के संबंधों पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है। चीन जैसी अन्य प्रमुख शक्तियाँ इन संगठनों में अपनी भूमिका बढ़ा सकती हैं।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह सदस्यता-वापसी की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होगी और क्या इसमें अमेरिकी कांग्रेस की कोई भूमिका होगी। इस निर्णय की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है।

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Author: ainewsworld

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