बांग्लादेश चुनाव: संयुक्त राष्ट्र ने पर्यवेक्षक न भेजने के फैसले से बढ़ी चिंताएं

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा, “हम चुनावों और बांग्लादेशी लोगों के अपने देश के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण की स्वतंत्र अभिव्यक्ति का किसी भी तरह से समर्थन करेंगे।”

संयुक्त राष्ट्र ने आगामी 12 फरवरी को होने वाले बांग्लादेश संसदीय चुनावों के लिए अपने आधिकारिक पर्यवेक्षक नहीं भेजने का फैसला किया है। इस फैसले ने चुनाव प्रक्रिया की अंतरराष्ट्रीय निगरानी और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने 5 जनवरी को न्यूयॉर्क में हुई प्रेस वार्ता में स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र केवल महासभा या सुरक्षा परिषद के विशेष आदेश पर ही चुनाव पर्यवेक्षक तैनात करता है, और बांग्लादेश के लिए ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है ।

यूएन की भूमिका और तकनीकी सहायता का विकल्प

हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने औपचारिक पर्यवेक्षक दल न भेजने का निर्णय लिया है, लेकिन डुजारिक ने यह भी बताया कि ढाका स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय अलग से मंजूरी मिलने पर तकनीकी सहायता प्रदान कर सकता है । उन्होंने कहा, “मैं आपके लिए जांच कर सकता हूं कि क्या संयुक्त राष्ट्र देश कार्यालय कोई तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है, जो कि चुनावों के संदर्भ में हम अक्सर करते हैं।”

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की आलोचना

इस बीच, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश ने चुनाव आयोग की उस योजना की कड़ी आलोचना की है जिसमें विदेशी पर्यवेक्षकों के लिए ठहरने की सुविधाओं को बढ़ाने का प्रस्ताव है। संगठन के कार्यकारी निदेशक इफ्तेखारुज्जमान ने इस कदम को “अविवेकपूर्ण, भेदभावपूर्ण और विरोधाभासी” बताते हुए सवाल किया कि घरेलू पर्यवेक्षकों को इसी तरह की सहायता क्यों नहीं दी जाती ।

उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी पर्यवेक्षकों के लिए विशेष सुविधाओं की यह प्रथा चुनाव की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर सकती है और हितों के टकराव भी पैदा कर सकती है ।

संयुक्त राष्ट्र का पिछला रुख और वर्तमान संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति अपनी स्थिर स्थिति बनाए रखी है। दिसंबर 2023 में, डुजारिक ने मुक्त और निष्पक्ष चुनावों के लिए अपनी अपील दोहराई थी, यह कहते हुए कि “हम मुक्त और निष्पक्ष चुनावों का आह्वान करते हैं, जहां लोग बिना किसी डर के स्वतंत्र रूप से मतदान कर सकें।”

हाल के हफ्तों में, संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में राजनीतिक रैलियों में हिंसा की रिपोर्टों पर भी चिंता व्यक्त की है, जिसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हो गए । महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से हिंसा या अत्यधिक बल प्रयोग से बचने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के अधिकार का सम्मान करने का आह्वान किया है ।

राजनीतिक घटनाक्रम और यूएन की प्रतिक्रिया

· विपक्षी नेता की वापसी: जब बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की 17 साल बाद देश में वापसी के बारे में पूछा गया, तो डुजारिक ने कहा, “मैं खबरों का आकलनकर्ता नहीं हूं। पत्रकार खबरों का आकलन करते हैं।”
· पूर्व प्रधानमंत्री का निधन: पूर्व प्रधानमंत्री खालेदा जिया के निधन पर डुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र “उनके परिवार और बांग्लादेश के लोगों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता है” ।
· चुनाव पश्चात टिप्पणी: डुजारिक ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र “चुनाव के बाद कुछ कह सकता है”, लेकिन मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए उनकी स्थिति अपरिवर्तित रहेगी ।

अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य और ऐतिहासिक संदर्भ

बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने 2001 में आठवें संसदीय चुनाव से पहले अंतिम बार स्वयंसेवकों को चुनाव प्रक्रिया का निरीक्षण करने के लिए भेजा था ।

2018 के चुनावों से पहले, तत्कालीन महासचिव बान की-मून ने सभी हितधारकों से हिंसा, डर और जबरदस्ती से मुक्त माहौल सुनिश्चित करने का आह्वान किया था ताकि शांतिपूर्ण, विश्वसनीय और समावेशी चुनाव संभव हो सके ।

यूएन की चुनाव निगरानी नीति

संयुक्त राष्ट्र की चुनाव निगरानी की वर्तमान नीति के अनुसार:

· पर्यवेक्षक केवल यूएन महासभा या सुरक्षा परिषद के आदेश पर भेजे जाते हैं
· संयुक्त राष्ट्र अब स्वतंत्र रूप से चुनाव पर्यवेक्षण मिशन नहीं भेजता है
· देश स्तरीय कार्यालय तकनीकी सहायता प्रदान कर सकते हैं यदि अलग से अनुमोदित किया गया हो

चुनाव की विश्वसनीयता पर प्रभाव

संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षक न भेजने के फैसले और विदेशी पर्यवेक्षकों के लिए विशेष सुविधाओं पर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की आलोचना ने बांग्लादेश में आगामी चुनावों की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डुजारिक ने इस बीच यह भी स्पष्ट किया है कि संयुक्त राष्ट्र “बांग्लादेशी लोगों के अपने देश के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण की स्वतंत्र अभिव्यक्ति” का समर्थन करता है ।

जैसे-जैसे 12 फरवरी का चुनाव नजदीक आ रहा है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय बांग्लादेश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और चुनावी निष्पक्षता पर बारीकी से नजर रखे हुए है। संयुक्त राष्ट्र की ओर से औपचारिक पर्यवेक्षकों की अनुपस्थिति में, अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों और स्थानीय निगरानी समूहों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज