वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई से भू-राजनीतिक भूचाल, संयुक्त राष्ट्र में जुटी सुरक्षा परिषद

वेनेजुएला संकट: अमेरिकी हस्तक्षेप पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक·
मादुरो गिरफ्तारी और वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर चर्चा

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आज वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर चर्चा के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई है। यह बैठक अस्थायी सदस्य कोलंबिया के अनुरोध पर हुई है, जिसे स्थायी सदस्य चीन और रूस का समर्थन प्राप्त है। इस बैठक के आयोजन के समय ही, न्यूयॉर्क की एक अदालत में मादुरो की नशीले पदार्थों और आतंकवाद के आरोपों में पेशी हो रही है।

महासचिव ने कहा – ‘खतरनाक उदाहरण’

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतेरेस ने वेनेजुएला में हुई घटनाओं को “खतरनाक उदाहरण” करार दिया है। संयुक्त राष्ट्र प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने कहा कि महासचिव अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान न होने से “बेहद चिंतित” हैं और उन्होंने मानवाधिकारों तथा कानून के शासन का पालन करते हुए समावेशी संवाद का आह्वान किया है।

वैश्विक प्रतिक्रियाएं: एकजुटता और आलोचना

वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई के बाद विश्व समुदाय की प्रतिक्रियाएं विभाजित हैं:

· रूस और चीन का कड़ा रुख: रूस ने इस कार्रवाई को “स्वीकार्य नहीं” बताया है और अपने नागरिकों को वेनेजुएला की यात्रा से बचने की चेतावनी जारी की है। चीन ने भी एक संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा की है।
· यूरोपीय संघ की सतर्क प्रतिक्रिया: यूरोपीय आयोग ने कहा है कि मादुरो का सत्ता से हटना वेनेजुएला में “लोकतांत्रिक परिवर्तन का अवसर” है, क्योंकि वह एक वैध रूप से निर्वाचित नेता नहीं थे। हालांकि, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन नहीं किया है।
· लैटिन अमेरिका में असहमति: मैक्सिको ने किसी भी रूप में हस्तक्षेप का कड़ा विरोध किया है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकियों के जवाब में कहा है कि अगर उनके देश पर हमला हुआ तो वह “फिर से हथियार उठा लेंगे”।

अमेरिकी रणनीति और ट्रम्प का ‘चार्ज’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि वेनेजुएला में “चार्ज” अमेरिका का है। ट्रम्प प्रशासन का मानना है कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ के सहयोग से बिना बड़े पैमाने पर सैन्य संसाधन लगाए देश पर नियंत्रण रखा जा सकता है। हालांकि, अमेरिका के इस दृष्टिकोण की कई विशेषज्ञों ने आलोचना की है। नॉट्रे डेम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर मैरी एलेन ओ’कॉनेल के अनुसार, किसी दूसरे देश पर नियंत्रण का दावा करना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

तेल संसाधन: संकट का केंद्रबिंदु

इस संकट के केंद्र में वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार है, जो दुनिया में सबसे बड़ा है। ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिकी तेल कंपनियां वहां के “टूटे हुए तेल ढांचे को ठीक करने” के लिए अरबों डॉलर निवेश करेंगी। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि वहां के तेल उद्योग को पुनर्जीवित करना एक लंबी और जटिल प्रक्रिया होगी, जिसमें रूस और चीन के मौजूदा निवेश भी एक चुनौती हैं।

आगे की राह

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक इस बात का संकेत देगी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस संकट को कितनी गंभीरता से ले रहा है। अमेरिका की इस कार्रवाई ने न केवल लैटिन अमेरिका, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति में भी नई उथल-पुथल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अन्य देशों में अमेरिकी विदेश नीति की अप्रत्याशित प्रकृति के बारे में चिंता बढ़ी है। वेनेजुएला का भविष्य अब कार्यवाहक राष्ट्रपति रोड्रिगेज़ के रुख, अमेरिकी दबाव और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

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Author: ainewsworld

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