कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने प्रगति प्लेटफॉर्म की 50वीं बैठक में खुलासा किया कि इसने 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की 3300+ परियोजनाओं की समीक्षा की और 7000+ मुद्दे सुलझाए। जानें कैसे यह मंच भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और अंतरराष्ट्रीय निवेश को गति दे रहा है।
केंद्रीय कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने कहा है कि प्रधानमंत्री की प्रमुख शासन पहल ‘प्रगति’ (PRAGATI – Pro-Active Governance and Timely Implementation) ने बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन में तेजी लाने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया है। यह प्लेटफॉर्म परियोजनाओं में आने वाली बाधाओं को दूर करने में सफल रहा है।
गुरुवार को नई दिल्ली में प्रगति की 50वीं बैठक के बाद आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में श्री सोमनाथन ने बताया कि इस बैठक में लगभग 85 लाख करोड़ रुपये (लगभग 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक) मूल्य की 3,300 से अधिक परियोजनाओं की समीक्षा की गई। साथ ही, ‘एक राष्ट्र एक राशन कार्ड’ और ‘प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ सहित 61 केंद्रीय योजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा हुई।
10 वर्षों में हल हुए हजारों मुद्दे
कैबिनेट सचिव ने बताया कि पिछले एक दशक से चल रही प्रगति प्रणाली के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े कुल 7,735 मुद्दों में से 7,156 मुद्दों का सफलतापूर्वक समाधान किया जा चुका है। यह दर 92% से अधिक है, जो इस मंच की प्रभावशीलता को दर्शाता है।
प्रमुख परियोजनाओं को मिली गति
श्री सोमनाथन ने उदाहरण देते हुए बताया कि प्रगति प्लेटफॉर्म ने जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक जैसी रणनीतिक परियोजना और असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील रेल एवं सड़क पुल जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की सार्वजनिक परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों के व्यापक समाधान के रूप में इस प्लेटफॉर्म की कल्पना की थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के मार्ग में आने वाली रुकावटों को त्वरित रूप से दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय को बढ़ाना है।
अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि प्रगति जैसे प्लेटफॉर्म से भारत में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समय पर पूरा होने की संभावना बढ़ती है, जो अमेरिका, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देशों के निवेशकों और कंपनियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है। ऐसे मंच नीतिगत निरंतरता और परियोजना पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं, जो विदेशी निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण हैं।
Author: ainewsworld