भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार में ऐतिहासिक कदम: आज से शुरू हुई 100% शुल्क-मुक्त पहुंच

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऐतिहासिक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हो गया है। आज, 1 जनवरी 2026 से, भारत का ऑस्ट्रेलिया को सभी निर्यात शुल्क-मुक्त हो गया है। इसी के साथ, भारत ने भी ऑस्ट्रेलिया के 70% से अधिक निर्यात पर शुल्क हटा दिए हैं। यह कदम द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक बड़ी रणनीतिक पहल है।

समझौते की वर्षगांठ पर मिली नई गति

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 29 दिसंबर को समझौते की तीसरी वर्षगांठ के अवसर पर यह घोषणा की थी। यह समझौता दिसंबर 2022 में लागू हुआ था और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। तीसरे वर्ष में प्रवेश के साथ ही, समझौते के तहत निर्धारित शुल्क उन्मूलन की समयसीमा का यह चरण पूरा हुआ है।

किन क्षेत्रों को मिलेगा सबसे बड़ा लाभ?

भारतीय निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच से कई प्रमुख उद्योगों को तत्काल लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें शामिल हैं:

· रत्न एवं आभूषण: भारत के हीरे और सोने के जेवरात को बढ़ावा।
· कपड़ा एवं परिधान: सूती और तैयार वस्त्रों के निर्यात में वृद्धि।
· चमड़ा एवं फुटवियर: चमड़े के सामान और जूतों के लिए नया बाजार।
· इंजीनियरिंग सामान: मशीनरी और औद्योगिक उत्पाद।
· फर्नीचर, खाद्य उत्पाद, चिकित्सा उपकरण और ऑटो पार्ट्स भी लाभान्वित होंगे।

ऑस्ट्रेलिया से क्या आएगा?

बदले में, भारत ने ऑस्ट्रेलिया के लिए अपने बाजारों के द्वार और खोल दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया से कोयला, खनिज अयस्क, कच्चा माल और शराब (वाइन) जैसे उत्पादों को प्राथमिकता के आधार पर शुल्क-मुक्त पहुंच मिल गई है। इससे भारतीय उद्योगों को सस्ते कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी और भारतीय उपभोक्ताओं को ऑस्ट्रेलियाई वाइन जैसे उत्पाद कम कीमत पर मिल सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भविष्य की राह

यह समझौता न केवल भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यह दो प्रमुख लोकतंत्रों और अर्थव्यवस्थाओं के बीच रणनीतिक विश्वास को दर्शाता है। अमेरिका, जापान, जर्मनी और चीन जैसे देश इस समझौते को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लाने और नए व्यापार गठजोड़ के रूप में देख रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 46-48 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर है, अगले पांच वर्षों में काफी बढ़ सकता है। यह समझौता व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जिस पर दोनों देश बातचीत कर रहे हैं और जिसमें सेवाओं, निवेश और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्र शामिल होंगे।

भारत-ऑस्ट्रेलिया ECTA का यह नया चरण ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को गति देगा। साथ ही, यह ऑस्ट्रेलिया को भारत के विशाल बाजार में गहरी पहुंच प्रदान करेगा। यह एक ऐसी जीत-जीत की स्थिति है जो न केवल व्यापार आंकड़ों में बल्कि रोजगार सृजन, निवेश और रणनीतिक साझेदारी में भी सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखती है।

 

ainewsworld
Author: ainewsworld

यह भी पढ़ें

टॉप स्टोरीज