केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस के अवसर पर इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टरों के लिए पहला भारतीय मानक जारी किया। इस मानक का उद्देश्य देश में बनने वाले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन को सुनिश्चित करना है।
मानक का नाम और महत्व:
मंत्रीजोशी ने भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में आईएस 19262: 2025 ‘इलेक्ट्रिक कृषि ट्रैक्टर – परीक्षण संहिता’ जारी किया। यह मानक भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) द्वारा तैयार किया गया है। इससे पहले इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के परीक्षण के लिए देश में कोई समर्पित और एकीकृत मानक नहीं था।
क्या सुनिश्चित करेगा नया मानक?
यह मानक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरोंके परीक्षण के लिए एक समान प्रोटोकॉल उपलब्ध कराएगा। इसमें ट्रैक्टर की शक्ति (पीटीओ पावर, ड्रॉबार पावर), विभिन्न घटकों का निरीक्षण, कंपन मापन और सुरक्षा जांच जैसे पहलू शामिल हैं। इससे निर्माताओं को विश्वसनीय उत्पाद बनाने में मदद मिलेगी और किसानों को ट्रैक्टर की क्षमताओं पर भरोसा हो सकेगा।
किसानों और पर्यावरण को फायदा:
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर डीजल ट्रैक्टरोंके मुकाबले एक टिकाऊ विकल्प हैं। इनसे कम उत्सर्जन, कम परिचालन लागत और कम रखरखाव खर्च की उम्मीद है। साथ ही, ये किसानों को कम शोर और धुएं से मुक्त कार्य वातावरण प्रदान करेंगे। यह कदम देश में स्वच्छ कृषि प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और कृषि क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कैसे तैयार हुआ मानक?
कृषिएवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुरोध पर बीआईएस ने यह मानक तैयार किया। इसमें ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों, परीक्षण एजेंसियों, आईसीएआर, कृषि इंजीनियरिंग संस्थानों और किसान संगठनों सहित सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी रही। इस मानक को अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं और घरेलू जरूरतों के अनुरूप बनाया गया है।
भविष्य पर प्रभाव:
इस मानक के लागू होने से देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के निर्माण और उनके व्यापक अपनान में तेजी आने की उम्मीद है। यह नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और अंततः सतत कृषि मशीनीकरण को मजबूती प्रदान करेगा। यह मानक फिलहाल स्वैच्छिक है।
Author: ainewsworld