विश्व शांति की दिशा में एक अहम पड़ाव ? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की के बीच फ्लोरिडा में हुई ऐतिहासिक वार्ता के बाद, रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। दोनों नेताओं ने एक शांति समझौते को “बहुत करीब” बताया है, लेकिन भू-राजनीतिक इतिहास में दर्ज कुछ कड़वे सबक और मौजूदा गहरे मतभेद, इस राह की मुश्किलों की याद दिलाते हैं।
मार-ए-लागो वार्ता: मुख्य बिंदु और प्रगति
28 दिसंबर, 2025 को हुई इस लंबी बैठक और ट्रम्प द्वारा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पहले हुई दो घंटे से अधिक की टेलीफोन वार्ता के बाद, दोनों पक्ष आशावादी नज़र आए।
· 90% समझौते का दावा: राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि 20-सूत्रीय शांति योजना पर 90% सहमति बन चुकी है।
· सुरक्षा गारंटी पर प्रगति: अमेरिका द्वारा यूक्रेन को 15 वर्षों की सुरक्षा गारंटी देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने इसे 50 वर्ष तक बढ़ाने की इच्छा जताई।
· त्रिपक्षीय वार्ता की संभावना: ट्रम्प ने अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की संभावना भी व्यक्त की, हालांकि यह “सही समय” पर ही हो सकती है।
विवादों की जड़: सुरक्षा गारंटी और भूभाग
वार्ता की सफलता दो बड़े और अटके हुए मुद्दों पर निर्भर करती है, जिन पर अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है।
· सुरक्षा गारंटी की अवधि
· अमेरिका का प्रस्ताव: 15 वर्ष
· यूक्रेन की मांग: 30 से 50 वर्ष
· महत्व: जेलेंस्की का मानना है कि मजबूत गारंटी के बिना युद्ध वास्तव में समाप्त नहीं माना जा सकता।
· विवादित क्षेत्रों का भविष्य
· मुख्य मुद्दा: रूस द्वारा नियंत्रित डोनबास क्षेत्र और ज़ापोरिज़्हिया परमाणु संयंत्र।
· रूस की मांग: यूक्रेन को डोनबास से अपनी सेनाएं पूरी तरह वापस बुलानी होंगी।
· यूक्रेन का रुख: जेलेंस्की चाहते हैं कि क्षेत्रीय मुद्दों पर अंतिम फैसला यूक्रेन की जनता के जनमत संग्रह (रेफरेंडम) द्वारा हो, जिसके लिए 60 दिनों की युद्धविराम आवश्यक है। रूस ने अस्थाई युद्धविराम के विचार को खारिज कर दिया है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और ऐतिहासिक संदर्भ
इस शांति प्रक्रिया को लेकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं, और अतीत के अनुभव भविष्य के लिए एक चेतावनी भी हैं।
· रूस और यूरोप की प्रतिक्रिया: क्रेमलिन के प्रवक्ता ने ट्रम्प के इस आकलन से सहमति जताई कि शांति “काफी करीब” है। वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वार्ता की प्रगति का स्वागत करते हुए यूक्रेन के लिए “अटल सुरक्षा गारंटी” की आवश्यकता पर जोर दिया।
· 2015 के मिन्स्क समझौते की विफलता: कई विश्लेषक और यूक्रेन के लोग पुराने समझौतों के टूटने के अनुभव के कारण सतर्क हैं। 2015 के मिन्स्क-2 समझौते को एक “कमजोर समझौता” माना जाता है जिसने रूस को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया और अंततः 2022 के पूर्ण पैमाने के आक्रमण का मार्ग प्रशस्त किया। एक विश्लेषक के अनुसार, “हम रूसियों पर शांति समझौते का भरोसा नहीं कर सकते”।
· ट्रम्प की शांति योजना पर बहस: प्रस्तावित योजना की कुक शर्तें, जैसे यूक्रेन की सेना का आकार सीमित करना और नाटो में शामिल न होने का संवैधानिक वादा, विवादास्पद रही हैं। कुछ यूरोपीय राजनेता और विश्लेषक इसे रूस के पक्ष में मानते हैं।
आगे की राह और निष्कर्ष
युद्ध विराम और स्थायी शांति के बीच का रास्ता अभी भी कांटों भरा है। यूक्रेनी और अमेरिकी टीमों द्वारा आने वाले दिनों में तकनीकी बातचीत जारी रखने की योजना है। ट्रम्प ने जनवरी में यूक्रेन और यूरोपीय नेताओं के साथ वाशिंगटन में एक और बैठक आयोजित करने पर भी सहमति दी है।
ट्रम्प और जेलेंस्की की वार्ता ने एक राजनयिक गति को तो जन्म दिया है, लेकिन एक टिकाऊ समझौते की सफलता न केवल सुरक्षा गारंटी की अवधि और विवादित क्षेत्रों के भविष्य जैसे जटिल मुद्दों पर सहमति पर, बल्कि अतीत की विफलताओं से सीख लेने पर भी निर्भर करेगी। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और दबाव के बिना, कोई भी समझौता दीर्घकालीन शांति की गारंटी नहीं दे सकता।
Author: ainewsworld