राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष समारोह में देश के प्रतिभाशाली बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ प्रदान किए। यह पुरस्कार वीरता, सामाजिक सेवा, पर्यावरण, खेल, कला एवं संस्कृति तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धि हासिल करने वाले बच्चों को दिए जाते हैं।


समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और कहा कि इन बच्चों ने अपने परिवार, समुदाय और पूरे देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने कहा, “यह पुरस्कार बच्चों को प्रोत्साहित करने और देश भर के सभी बच्चों को प्रेरित करने के उद्देश्य से प्रदान किए गए हैं।”
बलिदान और वीरता की परंपरा को याद किया
राष्ट्रपतिने अपने भाषण में देश के बाल नायकों की परंपरा को याद किया। उन्होंने विशेष रूप से गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके चार साहिबजादों के सर्वोच्च बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की महानता तब सुनिश्चित होती है जब उसके बच्चे देशभक्ति और उच्च आदर्शों से ओत-प्रोत होते हैं। उन्होंने कहा, “सत्य और न्याय के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले उन महान बाल नायकों को हम श्रद्धापूर्वक याद करते हैं।”
विभिन्न क्षेत्रों में छाई बाल प्रतिभा
इस वर्ष केपुरस्कार विजेताओं में देश भर से ऐसे बच्चे शामिल हैं, जिन्होंने अदम्य साहस से लेकर शानदार बौद्धिक उपलब्धियों तक, हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ी है।
·शतरंज की दुनिया में धूम: सात वर्षीय वाका लक्ष्मी प्रग्निका जैसे युवा खिलाड़ियों के कारण ही भारत को आज दुनिया में शतरंज की महाशक्ति माना जाता है।
· वीरता के अनूठे उदाहरण: अजय राज और मोहम्मद सिदान पी. ने अपनी सूझबूझ और बहादुरी से दूसरों की जान बचाकर वीरता का परिचय दिया। वहीं, नौ वर्षीय व्योमा प्रिया और ग्यारह वर्षीय कमलेश कुमार ने दूसरों को बचाते हुए स्वयं सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसे राष्ट्रपति ने विशेष रूप से याद किया।
· देश सेवा का जज्बा: दस वर्षीय श्रवण सिंह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान, युद्ध जैसे जोखिमों के बावजूद, सीमा पर तैनात सैनिकों को नियमित रूप से पानी और अन्य राशन पहुंचाकर सेवा भाव का अनोखा उदाहरण पेश किया।
· शारीरिक चुनौतियों को पार कर: दिव्यांग बेटी शिवानी होसुरू उप्पारा ने आर्थिक और शारीरिक सीमाओं को पार करते हुए खेल जगत में शानदार सफलता हासिल की।
· खेल में राष्ट्रीय गौरव: वैभव सूर्यवंशी ने अत्यंत प्रतिस्पर्धी क्रिकेट जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाई और कई रिकॉर्ड स्थापित किए।
राष्ट्रपति मुर्मु ने विश्वास व्यक्त किया कि यह साहसी और प्रतिभाशाली बच्चे भविष्य में भी अच्छे कार्य करते रहेंगे और भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे। यह समारोह न केवल बच्चों की उपलब्धियों का जश्न था, बल्कि देश के युवा मस्तिष्क में छिपी असीम संभावनाओं का एक प्रतीक भी था।
Author: ainewsworld