मनरेगा से आगे बढ़ा भारत: अब 125 दिन के रोजगार की गारंटी, ₹1.51 लाख करोड़ के बजट के साथ पारित हुआ ‘विकसित भारत जी राम जी’ कानून

भारत की ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘विकसित भारत जी राम जी’ बिल को अपनी मंजूरी दे दी है, जिससे अब यह कानून बन गया है। इस नए कानून को लेकर फैलाए जा रहे ‘भ्रम’ को दूर करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि यह योजना महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को खत्म नहीं करेगी, बल्कि उसका एक उन्नत और विस्तारित संस्करण है।
मंत्री चौहान ने जोर देकर कहा कि “विकसित भारत: जी राम जी योजना मनरेगा के आगे का कदम है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के बारे में जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर देश को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
मुख्य विशेषताएं: 125 दिन का काम, मजबूत सुरक्षा कवच और विशाल बजट
नए कानून के तहत ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले लाभों में बड़ा विस्तार किया गया है:
1. बढ़ी हुई रोजगार गारंटी: अब मजदूरों को सालाना 100 के बजाय 125 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह गारंटी मनरेगा के मौजूदा ढांचे में एक महत्वपूर्ण जोड़ है।
2. सशक्त बेरोजगारी भत्ता: अगर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो बेरोजगारी भत्ते के प्रावधान को और मजबूत बनाया गया है, ताकि मजदूरों की आय में नुकसान न हो।
3. विलंबित मजदूरी पर अतिरिक्त राशि: नए प्रावधान के अनुसार, अगर मजदूरी का भुगतान देरी से किया जाता है, तो मजदूरों को अतिरिक्त मुआवजे की राशि देने का भी नियम बनाया गया है।
4. अभूतपूर्व बजट आवंटन: योजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए इसी वर्ष ₹1,51,282 करोड़ (लगभग 181 बिलियन अमेरिकी डॉलर) से अधिक की विशाल धनराशि प्रस्तावित की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध हो और उस पैसे से गांवों का समग्र विकास हो सके।
लक्ष्य: ‘विकसित गांव’ से ‘विकसित भारत’ तक
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना का मुख्य लक्ष्य ‘विकसित भारत’ के निर्माण की नींव रखना है, जो ‘विकसित गांवों’ से शुरू होगी। योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) निर्माण, आजीविका बढ़ाने वाली गतिविधियों और प्राकृतिक आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों को स्वावलंबी, गरीबी मुक्त और रोजगार से परिपूर्ण बनाना है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे किसानों को कृषि कार्यों के समय को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किया गया है, ताकि 125 दिन के रोजगार की गारंटी उनकी खेती-बाड़ी में बाधा न बने।
कार्यान्वयन को मजबूती: प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर 9%
नए कानून में एक और महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रशासनिक व्यय की सीमा 6% से बढ़ाकर 9% कर दी गई है। इससे प्रस्तावित ₹1.51 लाख करोड़ में से लगभग ₹13,000 करोड़ प्रशासनिक खर्च के लिए उपलब्ध होंगे। मंत्री के अनुसार, इस राशि से पंचायत सचिवों, रोजगार सहायकों और तकनीकी स्टाफ को समय पर और पर्याप्त वेतन मिल सकेगा, जिससे वे योजना को पूरी क्षमता और पारदर्शिता के साथ कार्यान्वित कर पाएंगे।
‘विकसित भारत जी राम जी’ अधिनियम को भारत की ग्रामीण विकास रणनीति में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह न केवल रोजगार के दिनों और वित्तीय संसाधनों में विस्तार करता है, बल्कि कार्यान्वयन तंत्र को भी मजबूती प्रदान करता है। सरकार का दावा है कि यह कानून गरीबों के हक में, विकास के हक में और मजदूरों को गरिमामय रोजगार की पूरी गारंटी देने वाला है। हालांकि, विपक्ष और कुछ विशेषज्ञों द्वारा इसकी व्यावहारिकता और परिणामों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिस पर आने वाले समय में बहस जारी रहने की उम्मीद है।
Author: ainewsworld