“यह समझौता जन-केंद्रित विदेश नीति का बेहतरीन उदाहरण है। यह हमारे इनोवेटर्स, उद्यमियों, किसानों, MSMEs, छात्रों और युवाओं के लिए समृद्धि के नए रास्ते खोलेगा,” – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर केंद्र सरकार का उत्साह साफ झलक रहा है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने इस समझौते की सराहना करते हुए इसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की एक बड़ी व्यापारिक उपलब्धि बताया है।
एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि “मोदी सरकार की व्यापार कूटनीति नए मील के पत्थर स्थापित कर रही है।” उन्होंने इस समझौते को देश के लिए एक अत्यंत लाभकारी कदम बताते हुए कहा कि इससे भारत को 20 बिलियन डॉलर (लगभग 1.66 लाख करोड़ रुपये) के निवेश की प्राप्ति होने की उम्मीद है।
किन क्षेत्रों को मिलेगा लाभ?
श्री शाह ने जोर देकर कहा कि यह समझौता भारत के विभिन्न वर्गों के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोलेगा:
· इनोवेटर्स और उद्यमी: न्यूज़ीलैंड के बाजार में आसान पहुंच और प्रौद्योगिकी साझेदारी के नए रास्ते।
· किसान और कृषि क्षेत्र: कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा और कृषि प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान।
· सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME): निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में शामिल होने का मौका।
· छात्र और युवा: न्यूज़ीलैंड में शिक्षा एवं रोजगार के बेहतर अवसर।
जन-केंद्रित विदेश नीति की सफलता
अपने बयान में श्री अमित शाह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भारत-न्यूज़ीलैंड FTA, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन-केंद्रित विदेश नीति का एक सटीक उदाहरण है।
उन्होंने कहा, “यह समझौता इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि किस प्रकार प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जन-केंद्रित विदेश नीति नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा कर रही है।” उनके अनुसार, यह नीति केवल कूटनीतिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा लाभ देश के आम नागरिकों, व्यापारियों और युवाओं को मिलता है।
द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
यह मुक्त व्यापार समझौता भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मजबूत आर्थिक एवं रणनीतिक साझेदारी की नींव रखेगा। व्यापार और निवेश बढ़ने से दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच संबंध और प्रगाढ़ होंगे। न्यूज़ीलैंड, डेयरी उत्पादों, लकड़ी और विशेषज्ञ सेवाओं जैसे क्षेत्रों में मजबूत है, जबकि भारत सॉफ्टवेयर, दवाइयां, इंजीनियरिंग सामान और कपड़ा निर्यात कर सकता है। इस पारस्परिक पूरकता से दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि भारत-न्यूज़ीलैंड FTA ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को वैश्विक साझेदारी से जोड़ने का काम करेगा। यह न केवल निवेश और रोजगार लाएगा, बल्कि भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक विश्वसनीय और महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में भी स्थापित करेगा.
Author: ainewsworld