कपास के दाम क्यों गिरे ? आयात शुल्क छूट और एमएसपी ने कैसे बनाया बाजार में संतुलन ? आप भी जाने

कपास पर आयात शुल्क छूट से गिरावट का दोहरा लाभ: उद्योग को सस्ता कच्चा माल, किसानों को एमएसपी का भरोसा

कपास पर सरकार द्वारा दी गई आयात शुल्क में छूट का सकारात्मक प्रभाव घरेलू बाजार में दिखने लगा है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप घरेलू स्तर पर भी कपास की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वस्त्र उद्योग को किफायती कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है। वहीं, सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के जरिए कपास किसानों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ सिंक में घरेलू कीमतें

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, कपास पर 11 प्रतिशत आयात शुल्क में दी गई अस्थायी छूट के बाद से घरेलू बाजार में कपास के दाम नरम हुए हैं। आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर 2025 में कपास (समतुल्य एस-6 ग्रेड) की अंतरराष्ट्रीय कीमत गिरकर लगभग 73.95 अमेरिकी सेंट प्रति पाउंड पर पहुंच गई, जबकि अगस्त 2025 में यह लगभग 79.15 सेंट थी।

इसी प्रकार का रुझान घरेलू बाजार में भी देखने को मिला है। देश में कपास की कीमत लगभग 57,000 रुपये प्रति कैंडी से घटकर वर्तमान में 51,500 से 52,500 रुपये प्रति कैंडी के बीच व्यापार कर रही है। यह गिरावट वैश्विक मूल्य परिवर्तन, मांग-आपूर्ति की स्थिति और विनिमय दर जैसे कारकों के अनुरूप है।

किसानों के लिए सुरक्षा कवच बना एमएसपी

इस गिरावट के बीच कपास किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का भरोसा मिला हुआ है। सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का एमएसपी 7,710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास का एमएसपी 8,110 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले सीजन की तुलना में 589 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। एमएसपी का उद्देश्य किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित कराना है।

इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए भारतीय कपास निगम लिमिटेड (सीसीआई) एमएसपी पर खरीदारी में सक्रिय है। 11 दिसंबर 2025 तक, सीसीआई ने 11 राज्यों के 149 जिलों में स्थापित 570 खरीद केंद्रों के माध्यम से लगभग 31.19 लाख गांठें खरीदी हैं, जिसके लिए किसानों को 13,492 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।

उद्योग की जरूरतों को पूरा करने के लिए बढ़े आयात

भारत के विशाल वस्त्र उद्योग, जो देश की कुल कपास खपत का लगभग 94 प्रतिशत हिस्सा है, की गुणवत्ता और विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयात शुल्क में छूट के बाद की अवधि (अगस्त-सितंबर 2025) में अमेरिका से कपास का आयात उद्योग की मांग के अनुरूप बना रहा।

कुल मिलाकर, कपास आयात 2023-24 के 15.20 लाख गांठों से बढ़कर 2024-25 में 41.40 लाख गांठों पर पहुंच गया, जिससे घरेलू मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने में मदद मिली। ये आयात विशेष प्रकार की कपास की उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं और निर्यात-उन्मुख वस्त्र उत्पादन को बढ़ावा देकर भारतीय वस्त्र क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर रहे हैं।

संतुलन बना रहा बाजार

विश्लेषकों का मानना है कि आयात शुल्क में छूट और एमएसपी आधारित खरीदारी की दोहरी नीति से बाजार में एक स्वस्थ संतुलन बना हुआ है। एक तरफ जहां उद्योग को कम कीमत पर गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ किसानों को न्यूनतम तय मूल्य का आश्वासन मिलने से वे मजबूरी में बेचने से बचे हुए हैं। इस पूरे समीकरण का उद्देश्य देश के कपास क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से मजबूत और टिकाऊ बनाना है।

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Author: ainewsworld

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