जनजातीय कला को मिलेगी ग्लोबल पहचान: सरकार ने लॉन्च किया ‘आदि संस्कृति’ पोर्टल, अब ‘TribalX’ बनेगा भविष्य का ई-लर्निंग हब

भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत और कला को आधुनिक डिजिटल युग से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। लोकसभा में एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने बताया कि जनजातीय संस्कृति के संरक्षण और प्रचार के लिए ‘आदि संस्कृति’ (Adi Sanskriti) डिजिटल प्लेटफॉर्म का बीटा संस्करण सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया है।

‘आदि हाट’ से खुलेगा वैश्विक बाजार का रास्ता

​इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऑनलाइन बाजार ‘आदि हाट’ है। यह सीधे तौर पर भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ लिमिटेड (TRIFED) के साथ जुड़ा हुआ है।

  • कारीगरों को फायदा: अब दूर-दराज के गांवों में रहने वाले जनजातीय कलाकार अपने उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बेच सकेंगे।
  • ब्रांडिंग: TRIFED इन उत्पादों के लिए न केवल बाजार ढूंढेगा, बल्कि उन्हें एक वैश्विक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में मदद भी करेगा।

डिजिटल यूनिवर्सिटी: घर बैठे सीखें जनजातीय कला

​’आदि संस्कृति’ केवल एक बाजार नहीं, बल्कि ज्ञान का भंडार भी है। इसके ‘आदि विश्वविद्यालय’ अनुभाग के तहत वर्तमान में 45 से अधिक गहन पाठ्यक्रम (Courses) उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा:

  • आदि संपदा: इसमें जनजातीय विरासत से जुड़े लगभग 3,000 संकलित दस्तावेज मौजूद हैं।
  • उद्देश्य: जनजातीय ज्ञान प्रणालियों को सुरक्षित करना और नई पीढ़ी तक पहुँचाना।

अब ‘TribalX’ के रूप में होगा विस्तार

​परियोजना के दूसरे चरण में इसका स्वरूप और भी भव्य होने वाला है। सरकार ने ‘आदि संस्कृति’ का नाम बदलकर ‘TribalX’ करने का प्रस्ताव रखा है। यह एक पूर्ण ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म होगा, जिसे जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित किया जाएगा।

प्रोजेक्ट की मुख्य बातें और निवेश

    1. मानचित्रण (Mapping): जनजातीय अनुसंधान संस्थानों और पुरस्कार विजेता कलाकारों के सहयोग से कला रूपों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
    2. प्रामाणिकता: सभी डिजिटल सामग्री की जांच जनजातीय अनुसंधान संस्थान द्वारा की जाती है ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
    3. बजट: इस पूरी परियोजना के लिए ₹2,46,12,763.32 की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक लगभग ₹65.83 लाख खर्च किए जा चुके हैं।

​’आदि संस्कृति’ और आगामी ‘TribalX’ जैसे कदम भारत की ‘अनेकता में एकता’ की पहचान को डिजिटल मजबूती देंगे। इससे न केवल जनजातीय समाज आर्थिक रूप से सशक्त होगा, बल्कि दुनिया को भारत की प्राचीन कलाओं को करीब से देखने का मौका भी मिलेगा।

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Author: ainewsworld

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