भारत-जॉर्डन रिश्तों की नई इबारत: 75 साल की दोस्ती, 5 बिलियन डॉलर का लक्ष्य

अल हुसैनिया पैलेस में सुनहरे दीपक की रोशनी और गर्मजोशी भरे अंदाज में जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया, यह दृश्य दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की एक जीती-जागती तस्वीर थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जॉर्डन यात्रा सिर्फ एक राजनयिक दौरा नहीं, बल्कि 37 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पूर्ण द्विपक्षीय यात्रा थी। यह दौरा एक ऐतिहासिक मौके पर हुआ – जब भारत और जॉर्डन अपने कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत होते आर्थिक सहयोग, साझा सुरक्षा चुनौतियों पर एकरूपता और गहराते सांस्कृतिक संबंध इस यात्रा की खासियत रहे।

यात्रा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जॉर्डन के साथ भारत के संबंध 1947 में पहले सहयोग और मैत्री समझौते से शुरू हुए, जो 1950 में पूर्ण राजनयिक संबंधों में बदल गया। 2018 में जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला द्वितीय की भारत यात्रा के दौरान 12 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे। इसके बाद से दोनों नेता कई बार मिल चुके हैं – न्यूयॉर्क (2019), रियाद (2019), दुबई (2023) और इटली (2024) में।

इस यात्रा की खास बात यह रही कि जॉर्डन के युवराज अल हुसैन बिन अब्दुल्ला द्वितीय ने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री मोदी को जॉर्डन संग्रहालय तक कार चलाकर ले गए। इससे पहले, जॉर्डन के प्रधानमंत्री जाफर हसन ने हवाई अड्डे पर मोदी का स्वागत किया था।

आर्थिक सहयोग: व्यापार को पाँच गुना बढ़ाने का लक्ष्य

आर्थिक सहयोग इस यात्रा का प्रमुख आधार रहा। दोनों देशों के बीच व्यापार का लक्ष्य अगले 5 वर्षों में 5 बिलियन डॉलर तक पहुँचाना है। वर्तमान में भारत जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साथी है, जिसके बीच 2024 में 2.3 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ।

यात्रा के दौरान हुए प्रमुख समझौते:

· नवीकरणीय ऊर्जा में तकनीकी सहयोग: स्वच्छ ऊर्जा विकास और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में
· जल संसाधन प्रबंधन: जल संरक्षण, दक्षता और प्रौद्योगिकी साझाकरण
· पेट्रा-एलोरा ट्विनिंग समझौता: विरासत संरक्षण, पर्यटन और शैक्षणिक आदान-प्रदान
· सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2025–2029): लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करना
· डिजिटल सहयोग पर आशय पत्र: डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का अनुभव साझा करना

फर्टिलाइजर क्षेत्र में सहयोग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जॉर्डन भारत को फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता है। जॉर्डन इंडिया फर्टिलाइजर कंपनी (JIFCO) नामक संयुक्त उद्यम पहले से ही कार्यरत है। दोनों देशों की कंपनियाँ जॉर्डन में और अधिक निवेश के लिए चर्चा कर रही हैं ताकि भारत में फॉस्फेटिक उर्वरकों की बढ़ती माँग को पूरा किया जा सके।

रक्षा, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया। शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने भारत के आतंकवाद विरोधी संघर्ष को पूरा समर्थन दिया और आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की।

अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद जॉर्डन के शाह ने फोन पर प्रधानमंत्री मोदी से बात कर हमले की निंदा की थी और भारत के आतंकवाद विरोधी संघर्ष में अपना समर्थन दोहराया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने गाजा मुद्दे पर शाह अब्दुल्ला द्वितीय की “सक्रिय और सकारात्मक भूमिका” की सराहना की और क्षेत्र में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रौद्योगिकी, शिक्षा और सांस्कृतिक संबंध

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया। जॉर्डन में भारत-जॉर्डन सूचना प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता केंद्र पहले से कार्यरत है, जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2021 में हुआ था। इस केंद्र का लक्ष्य 3,000 जॉर्डनवासी पेशेवरों को साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विश्लेषण जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना है।

भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत जॉर्डन के लिए स्लॉट्स की संख्या 35 से बढ़ाकर 50 कर दी गई है। 2024-25 में जॉर्डन ने 37 ITEC स्लॉट्स, 4 विशेष कार्यकारी कार्यक्रम और 5 ICCR छात्रवृत्तियों का उपयोग किया।

सांस्कृतिक क्षेत्र में, जुलाई 2024 में एक ICCR प्रायोजित सांस्कृतिक दल ने जेराश महोत्सव में असम लोक नृत्य प्रस्तुत किया था। जॉर्डन में योग के अंतर्राष्ट्रीय दिवस का आयोजन रॉयल बॉटैनिकल गार्डन में राजकुमारी बस्मा बिंत अली के संरक्षण में किया गया।

जॉर्डन में भारतीय समुदाय

जॉर्डन में लगभग 17,500 भारतीय नागरिक रहते हैं, जो मुख्य रूप से कपड़ा, निर्माण, विनिर्माण, स्वास्थ्य सेवा और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में कार्यरत हैं। जॉर्डन ने 2009 से भारतीय पर्यटकों के लिए वीज़ा ऑन अराइवल और 2023 से ई-वीज़ा सुविधा शुरू की है।

भविष्य की दिशा: व्यापक साझेदारी का नया अध्याय

प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-जॉर्डन संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। दिसंबर 2025 में आयोजित भारत-जॉर्डन व्यापार मंच में दोनों देशों के प्रमुख व्यवसायियों ने भाग लिया। शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने इस मौके पर कहा कि जॉर्डन के मुक्त व्यापार समझौते और भारत की आर्थिक शक्ति को मिलाकर दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच एक आर्थिक गलियारा बनाया जा सकता है।

जॉर्डन की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और उन्नत रसद क्षमताओं को देखते हुए दोनों देशों के बीच परिवहन और रसद कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर सहमति बनी है। 2026 की पहली छमाही में 11वीं व्यापार और आर्थिक संयुक्त समिति के आयोजन पर भी सहमति हुई है।

अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा लचीला बुनियादी ढांचा गठबंधन (CDRI) और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) जैसे वैश्विक मंचों पर भी दोनों देश सहयोग बढ़ाएँगे।

भारत-जॉर्डन संबंध अब 75 वर्षों के विश्वास, साझा हित और सांस्कृतिक समझ की मजबूत नींव पर खड़े हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता में भी योगदान देगी। जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह मील का पत्थर हमें आने वाले समय में नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा।”

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Author: ainewsworld

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