केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में देश के स्कूली छात्रों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने वाले ‘जिज्ञासा’ (JIGYASA) कार्यक्रम की प्रभावशाली उपलब्धियों की जानकारी साझा की। इस छात्र-वैज्ञानिक संपर्क पहल से अब तक 14 लाख से अधिक स्कूली बच्चे और 80,000 शिक्षक लाभान्वित हो चुके हैं।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने बताया कि वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) का यह कार्यक्रम, मोदी सरकार के एक प्रमुख विज्ञान प्रसार प्रयास के रूप में, देश के युवा मन में खोज की भावना जगा रहा है।
क्या है जिज्ञासा कार्यक्रम?
‘जिज्ञासा’ की शुरुआत 2017 में केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवी) के सहयोग से की गई थी। इसका उद्देश्य स्कूली छात्रों को सीएसआईआर की प्रयोगशालाओं से सीधे जोड़कर, वैज्ञानिकों से संवाद और प्रायोगिक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान के प्रति आकर्षित करना है।
· अब तक 37 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में 3,900 से अधिक जिज्ञासा गतिविधियाँ आयोजित की जा चुकी हैं।
· कार्यक्रम में लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान, कार्यशालाएँ, आवासीय शिक्षण, हैकाथॉन और प्रयोग-आधारित सीखना शामिल है।
डिजिटल पहुँच और समावेशिता
2021 में आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से लॉन्च किया गया ‘जिज्ञासा वर्चुअल लैब’ इस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण डिजिटल आयाम है।
· इस प्लेटफॉर्म पर सिमुलेशन, एनिमेशन और इंटरैक्टिव मॉड्यूल उपलब्ध हैं।
· इसमें 401 सामग्रियाँ भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) में भी उपलब्ध हैं, जिससे दिव्यांग छात्रों के लिए विज्ञान शिक्षा सुलभ हुई है।
· इसके माध्यम से दूरदराज के क्षेत्रों के छात्र भी बिना किसी भौतिक बाधा के उच्च-गुणवत्ता वाली वैज्ञानिक सामग्री तक पहुँच प्राप्त कर रहे हैं।
प्रमुख आयोजन और भागीदारी
मंत्री ने कार्यक्रम के तहत हुए कुछ बड़े आयोजनों का उल्लेख किया:
· जिज्ञासा विज्ञान महोत्सव 2022 को 30,000 से अधिक प्रतिभागियों और 3,000 कंटेंट सबमिशन प्राप्त हुए, जिनमें से 75 को पुरस्कृत किया गया।
· इपिक हैकाथॉन 2024 के लिए 960 आवेदन आए, जिनमें से 47 चयनित छात्रों को 18 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं में ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप का अवसर मिला।
बढ़ता वित्तीय निवेश
सदन में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में कार्यक्रम के लिए बजट में निरंतर वृद्धि हुई है:
· 2021-22: 597.10 लाख रुपए
· 2022-23: 1,392.63 लाख रुपए
· 2023-24: 1,650.00 लाख रुपए
· 2024-25: 1,900.00 लाख रुपए
· 2025-26: 1,850.00 लाख रुपए (आवंटित)
देशव्यापी पहुँच और सहयोगी
कार्यक्रम का लाभ देश के कोने-कोने तक पहुँच रहा है। वित्तीय आवंटन के मामले में महाराष्ट्र, तेलंगाना, नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश अग्रणी रहे हैं, लेकिन असम से लेकर जम्मू-कश्मीर और केरल तक की प्रयोगशालाओं को भी सहायता प्राप्त हुई है।
जिज्ञासा ने नवोदय विद्यालय समिति, अटल इनोवेशन मिशन, आईआईटी बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मजबूत साझेदारी विकसित की है।
समावेशी पहल
· हरियाणा के करनाल में दिव्यांगजन छात्रों के लिए भारतीय सांकेतिक भाषा से सुसज्जित देश की पहली खगोल विज्ञान प्रयोगशाला स्थापित की गई है।
· 21-25 जुलाई 2025 के बीच आयोजित राष्ट्रव्यापी ‘एक दिन वैज्ञानिक सप्ताह’ में लगभग 14,000 छात्रों ने सीएसआईआर प्रयोगशालाओं का दौरा किया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ‘जिज्ञासा’ कार्यक्रम अब एक सशक्त राष्ट्रीय मंच बन गया है जो न केवल वैज्ञानिक जिज्ञासा जगाता है, बल्कि युवाओं को विज्ञान और शोध के क्षेत्र में कैरियर बनाने के लिए प्रेरित भी कर रहा है। यह पहल भारत के वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले, नवप्रवर्तनशील समाज के निर्माण के लक्ष्य को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
Author: ainewsworld