राजस्थान समुद्री तट से दूर होने के बावजूद देश की निर्यात-आयात गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहा है। राज्य में मौजूद 12 अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) व्यापारियों के लिए किफायती और सुगम लॉजिस्टिक्स सुविधा मुहैया करा रहे हैं। दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण द्वारा देश के प्रमुख बंदरगाहों में सबसे कम कार्गो और जहाजी शुल्क लागू किए जाने से यह लाभ और बढ़ गया है।
क्या हैं अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (ICD)?
आईसीडी ऐसे अंतर्देशीय टर्मिनल हैं जो समुद्री बंदरगाहों के सभी कार्य करते हैं। यहां निर्यात के लिए माल की कस्टम क्लियरेंस होती है और आयातित माल को रखा जा सकता है। इससे राजस्थान के उद्योगों को अपना सामान सीधे राज्य में ही प्रोसेस करके सीधे बंदरगाहों पर भेजने में आसानी होती है।
राजस्थान के प्रमुख अंतर्देशीय कंटेनर डिपो:
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा अधिसूचित राज्य के 12 आईसीडी में भीलवाड़ा, भिवाड़ी, जयपुर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, रावठा रोड (कोटा), मंडावरिया (किशनगढ़, अजमेर), हिण्डौन सिटी (करौली), काठूवास-मांढण (अलवर), धानक्या और किशनगढ़ शामिल हैं।
व्यापार के लिए फायदे:
· लागत प्रभावी समाधान: दीनदयाल पत्तन प्राधिकरण के कम शुल्क से निर्यातकों की परिवहन लागत में कमी आई है।
· सुविधा और गति: माल की कस्टम क्लियरेंस अब राज्य में ही हो जाती है, जिससे समय की बचत होती है और लॉजिस्टिक्स सरल हो गया है।
· कनेक्टिविटी: ये आईसीडी रेल और सड़क मार्ग से देश के प्रमुख बंदरगाहों से जुड़े हैं।
· अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: इस सुविधा से राज्य में उद्योगों को बढ़ावा मिल रहा है और रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
राजस्थान में अंतर्देशीय बंदरगाह सुविधाओं का विस्तार राज्य को एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित कर रहा है। यह न केवल स्थानीय व्यवसायों को वैश्विक बाजार से जोड़ रहा है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन’ जैसे राष्ट्रीय अभियानों में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
Author: ainewsworld