भारतीय भाषा उत्सव 2025 का हुआ समापन, शिक्षा मंत्रालय ने बहुभाषावाद और सांस्कृतिक विविधता को दिया बल

सुब्रमण्यम भारती की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए गीत-नृत्य, शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा के महत्व पर हुई चर्चा

शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने गुरुवार को राष्ट्रीय बाल भवन में भारतीय भाषा उत्सव 2025 के समापन समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर डीओएसईएल के सचिव संजय कुमार और यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार ने भाषाई विविधता और बहुभाषावाद के महत्व पर प्रकाश डाला।

भाषा और शिक्षा पर जोर
श्री संजय कुमार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों की समझ को मजबूत करती है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से कई भाषाएँ सीखने और अपनी अभिव्यक्ति को समृद्ध बनाने का आह्वान किया। सुब्रमण्यम भारती के जीवन व आदर्शों को याद करते हुए उन्होंने सामाजिक सुधार और बहुभाषिक भारत के प्रति उनके योगदान को रेखांकित किया।

प्रो. जगदीश कुमार ने विद्यार्थियों से कहा कि एक से अधिक भाषाएँ सीखने से आलोचनात्मक सोच और रचनात्मकता बढ़ती है। उन्होंने कहा कि बहुभाषावाद युवाओं को “विकसित भारत 2047” की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की धूम
कार्यक्रम में देश भर के विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भारत की सांस्कृतिक एवं भाषाई विविधता को गीत, नृत्य, नुक्कड़ नाटक और कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, एकलव्य आवासीय विद्यालय और राष्ट्रीय बाल भवन के विद्यार्थियों ने रंगारंग कार्यक्रम पेश किए।

भाषाई खेल और प्रदर्शनी
आयोजन में विभिन्न भारतीय भाषाओं में तैयार शिक्षण सामग्री की प्रदर्शनी लगाई गई। साथ ही भाषा-आधारित खेलों का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

क्यों है यह उत्सव महत्वपूर्ण?
भारतीय भाषा उत्सव का यह तीसरा संस्करण था, जो देश में बहुभाषिकता को बढ़ावा देने और युवाओं को भाषाई समृद्धि से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। शिक्षा नीति 2020 में मातृभाषा पर दिए गए बल को इस आयोजन के माध्यम से और गति मिली है।

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Author: ainewsworld

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