सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रिकॉर्ड 1,223 लाख मीट्रिक टन फसल की खरीद की गई, जिसके एवज में किसानों को सीधे 3.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के जरिए किसानों को मिलने वाले वित्तीय लाभ के बड़े आंकड़े सामने रखे हैं। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान किसानों से एमएसपी पर 1,223 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न की खरीद की गई और इसके बदले किसानों के खाते में सीधे 3.47 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी।
सरकार ने इसके साथ ही एमएसपी को लेकर चल रही “कानूनी गारंटी” की मांग के बीच यह भी स्पष्ट किया है कि कैसे वर्तमान प्रणाली के तहत 22 फसलों के लिए मूल्य समर्थन का कार्यान्वयन सुनिश्चित किया जाता है।
एमएसपी क्या है और कैसे तय होती है?
न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) वह कीमत है जिस पर सरकार किसानों से उनकी फसलों की खरीद करने का आश्वासन देती है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को बाजार मूल्य गिरने की स्थिति में होने वाले नुकसान से बचाना है।
· तय करने की प्रक्रिया: सरकार हर साल कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर, राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के विचारों को ध्यान में रखते हुए 22 अधिसूचित कृषि फसलों के लिए एमएसपी तय करती है।
· मूलभूत सिद्धांत: वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में एक पूर्व-निर्धारित सिद्धांत की घोषणा की गई थी, जिसके अनुसार एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर रखा जाता है। इसका मतलब है कि किसानों को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50% का लाभ सुनिश्चित किया जाता है।
दस साल में कितनी बढ़ी फसलों की कीमत?
सरकार के आंकड़े दर्शाते हैं कि पिछले एक दशक में एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2015-16 की तुलना में 2025-26 में अधिकांश फसलों के समर्थन मूल्य में दोगुने से भी अधिक का इजाफा देखा गया है।
प्रमुख फसलों में एमएसपी वृद्धि (प्रति क्विंटल):
· धान (सामान्य): ₹1,410 (2015-16) → ₹2,369 (2025-26)
· गेहूं: ₹1,525 (2016-17) → ₹2,585 (2026-27)
· अरहर (तुअर): ₹4,625 → ₹8,000
· मूंग: ₹4,850 → ₹8,768
· सोयाबीन (पीला): ₹2,600 → ₹5,328
· कपास (मध्यम रेशा): ₹3,800 → ₹7,710
इस वृद्धि का लाभ सीधे किसानों को मिला है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर के अनुसार, बढ़ी हुई एमएसपी से देश के किसान लाभान्वित हुए हैं, जो खरीद के आंकड़ों और किसानों को दी गई एमएसपी राशि से स्पष्ट है।
एमएसपी पर फसल खरीद कैसे होती है?
एमएसपी नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सरकार ने विभिन्न फसलों के लिए अलग-अलग खरीद तंत्र स्थापित किए हैं:
· अनाज और मोटे अनाज: भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्यों की अन्य नामित एजेंसियों के माध्यम से खरीद।
· दलहन, तिलहन और कोपरा: जब बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो जाता है, तो प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) योजना के तहत मूल्य समर्थन दिया जाता है। खरीद नेफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियां करती हैं।
· कपास और पटसन: क्रमशः भारतीय कपास निगम (सीसीआई) और भारतीय पटसन निगम (जेसीआई) के माध्यम से एमएसपी पर खरीद।
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सरकार निर्दिष्ट एजेंसियों के माध्यम से खरीद की पेशकश करती है, लेकिन किसानों के पास यह विकल्प होता है कि वे अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को बेचें या खुले बाजार में, जो भी उनके लिए अधिक लाभप्रद हो।
कानूनी गारंटी पर चल रही बहस
हाल ही में संसद में एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी का मुद्दा फिर से उठाया गया। विपक्षी सांसदों द्वारा इस संबंध में सवाल किए जाने पर कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मंत्री ने दावा किया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को मानते हुए कुल लागत पर 50% मुनाफा देकर एमएसपी तय कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर राज्य सरकारें दलहन की खरीद में ढिलाई करती हैं, तो केंद्र सरकार नैफेड जैसी एजेंसियों के माध्यम से सीधी खरीद करेगी। उन्होंने घोषणा की कि किसानों से तुअर, मसूर और उड़द की शत-प्रतिशत खरीद की जाएगी।
किसानों के लिए अन्य सहायता योजनाएं
एमएसपी के अलावा, सरकार ने किसानों के हित में कई अन्य पहल भी की हैं। इनमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना शामिल हैं, जिनके तहत वित्त वर्ष 2024-25 में किसानों को 12,256 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इन योजनाओं का उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल हानि से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।
एमएसपी का लाभ उठाने के लिए क्या करें किसान?
किसानों को एमएसपी का पूरा लाभ मिले, इसके लिए ध्यान रखने योग्य कुछ बातें:
· अपने राज्य के कृषि विभाग या खरीद पोर्टल (जैसे ई-उपार्जन) पर पंजीकरण कराएं।
· जमीन के रिकॉर्ड और आधार से लिंक बैंक खाते का विवरण तैयार रखें।
· फसल बेचने से पहले उसकी सफाई और ग्रेडिंग का ध्यान रखें।
· अपने जिले में घोषित खरीद केंद्रों और तिथियों की जानकारी लेते रहें।
एमएसपी की वर्तमान प्रणाली के तहत किसानों को मिलने वाले वित्तीय समर्थन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि, इसकी पहुंच और कानूनी दर्जे को लेकर चर्चा जारी है। सरकार का दावा है कि मौजूदा तंत्र के जरिए किसानों के हित सुनिश्चित किए जा रहे हैं, जबकि विपक्ष और कुछ किसान संगठन इसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने की मांग कर रहे हैं।
Author: ainewsworld