एक ऐतिहासिक परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश का ग्रामीण भारत, जहां ड्रोन की आंखों से नापी जा रही है हर इंच जमीन।
उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति स्वामित्व की परिभाषा बदल रही है। पंचायती राज मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के 90,573 लक्षित गाँवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 70,958 गाँवों में 1.08 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके हैं । यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी मिसाल है, बल्कि लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए वित्तीय सशक्तिकरण का आधार भी तैयार कर रही है।
स्वामित्व योजना के तहत उत्तर प्रदेश की जिलेवार प्रगति इस प्रकार है :
अग्रणी जिले (तैयार संपत्ति कार्डों की संख्या)
· सीतापुर: 3.39 लाख से अधिक
· बाराबंकी: 3.38 लाख से अधिक
· बदाऊं: 3.02 लाख से अधिक
· बिजनोर: 2.77 लाख से अधिक
· बरेली: 2.75 लाख से अधिक
उल्लेखनीय प्रगति वाले जिले
· बागपत: 225 में से 225 गाँवों में संपत्ति कार्ड तैयार (100%)
· शामली: 285 में से 285 गाँवों में संपत्ति कार्ड तैयार (100%)
· जालौन: 904 में से 904 गाँवों में संपत्ति कार्ड तैयार (100%)
· झांसी: 704 में से 704 गाँवों में संपत्ति कार्ड तैयार (100%)
न्यूनतम कवरेज वाले जिले
· सोनभद्र: 984 गाँवों में केवल 14,469 संपत्ति कार्ड
· चंदौली: 919 गाँवों में 46,663 संपत्ति कार्ड
· मिर्जापुर: 1,080 गाँवों में 42,282 संपत्ति कार्ड
ड्रोन तकनीक से सटीक मानचित्रण
स्वामित्व योजना की सफलता का राज इसकी अत्याधुनिक तकनीकी प्रक्रिया में छिपा है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग (एसओआई) सर्वेक्षण ग्रेड ड्रोन और सीओआरएस नेटवर्क का उपयोग करके 5 सेंटीमीटर तक की स्थितिगत सटीकता सुनिश्चित करता है ।
यह प्रक्रिया पारंपरिक भूमि सर्वेक्षण से काफी भिन्न और अधिक विश्वसनीय है। इसके बाद ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, संपत्ति स्वामियों और राजस्व अधिकारियों की भागीदारी से जमीनी सत्यापन किया जाता है। कोई भी सुधार संपत्ति मानचित्रों को अंतिम रूप देने से पहले शामिल कर लिया जाता है ।
देशव्यापी परिप्रेक्ष्य में स्वामित्व योजना
उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे प्रयासों का हिस्सा है। 24 अप्रैल, 2020 को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में संपत्ति मालिकों को “अधिकारों का रिकॉर्ड” प्रदान करना है ।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख उपलब्धियां:
· 3.17 लाख गाँवों में ड्रोन सर्वेक्षण पूरा (लक्षित 3.46 लाख गाँवों में से)
· 2.25 करोड़ से अधिक संपत्ति कार्ड तैयार
· 65 लाख से अधिक संपत्ति कार्ड वितरित
· 67,000 वर्ग किलोमीटर ग्रामीण आबादी भूमि का सर्वेक्षण
योजना के बहुआयामी लाभ
स्वामित्व योजना सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की एक व्यापक रणनीति है:
वित्तीय समावेशन: संपत्ति कार्ड ग्रामीणों को अपनी जमीन को गिरवी रखकर बैंक ऋण प्राप्त करने में सक्षम बनाता है ।
विवाद निपटान: स्पष्ट सीमांकन और कानूनी दस्तावेजों से संपत्ति विवादों में कमी आती है ।
ग्रामीण नियोजन: उच्च-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल मानचित्र बेहतर ग्राम पंचायत विकास योजनाओं का आधार बनते हैं ।
महिला सशक्तिकरण: संपत्ति कार्ड महिलाओं के नाम पर भी जारी किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है ।
चुनौतियाँ और आगे की राह
हालांकि स्वामित्व योजना ने उल्लेखनीय प्रगति की है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं। पंचायती राज मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह केंद्रीय वित्तीय प्लेटफार्मों से जुड़े संपत्ति कार्डों का जिलेवार डेटा नहीं रखता है । इसके अलावा, मंत्रालय की स्वामित्व डेटा को अन्य केंद्रीय रजिस्ट्री के साथ एकीकृत करके राष्ट्रीय ग्रामीण संपत्ति डेटाबेस बनाने की कोई योजना नहीं है ।
कुछ राज्यों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल और नागालैंड ने अभी तक इस योजना को लागू करने का निर्णय नहीं लिया है । वहीं झारखंड और मणिपुर में कार्यान्वयन फिलहाल स्थगित है ।
सरकार ने स्वामित्व योजना के लिए सर्वेक्षण कार्य को 2025-26 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है । यह समयसीमा मूल रूप से निर्धारित मार्च 2025 से आगे बढ़ाई गई है, जिसका कारण प्रतिकूल मौसम, दूरदराज के गाँवों तक पहुँचने में चुनौतियाँ और ड्रोन टीमों की तैनाती में देरी जैसे कारक बताए गए हैं ।
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स्वामित्व योजना भारत के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने वाली एक मौलिक पहल है। उत्तर प्रदेश में 1.08 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार होना इस बात का प्रमाण है कि तकनीक का सही उपयोग कैसे शताब्दियों पुरानी चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकता है। जैसे-जैसे यह योजना देश के अन्य हिस्सों में विस्तारित होगी, वैसे-वैसे “आत्मनिर्भर भारत” की परिकल्पना साकार होती नजर आएगी, जहां हर ग्रामीण न केवल अपनी जमीन का कानूनी मालिक होगा, बल्कि उसे अपनी आर्थिक प्रगति के लिए एक मजबूत संसाधन के रूप में भी इस्तेमाल कर सकेगा।
Author: ainewsworld