सरदार पटेल की एकता का संदेश फिर गूंजा: केवड़िया में ऐतिहासिक पदयात्रा का भव्य समापन, राष्ट्र एकजुट हुआ

यह सिर्फ धातु नहीं है। यह एकता की शक्ति में विश्वास रखने वाले प्रत्येक भारतीय की शक्ति है।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित ऐतिहासिक ‘सरदार@150 यूनिटी मार्च’ का भव्य समापन हुआ। 26 नवंबर से करमसद से शुरू हुई यह पदयात्रा आज गुजरात के केवड़िया स्थित विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पहुंचकर संपन्न हुई। केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और श्रीमती रक्षा खडसे ने गरुड़ेश्वर दत्त मंदिर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक प्रतिभागियों के साथ पैदल चलकर इस ऐतिहासिक क्षण को और भी यादगार बना दिया।

एक विराट सपने की साकार कहानी

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल एक पत्थर की मूर्ति नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और एकता का जीवंत प्रतीक है। अक्टूबर 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से शुरू हुई इस परियोजना ने 182 मीटर (597 फीट) की ऊंचाई के साथ दुनिया का रिकॉर्ड बनाया। यह प्रतिमा चीन के स्प्रिंग टेंपल बुद्ध से भी ऊंची है और लगभग 2,989 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई।

इसका निर्माण एक बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि थी। तीसरी श्रेणी के भूकंपीय क्षेत्र में बनी यह प्रतिमा बिना किसी सहारे के खड़ी है। निर्माण में 1,700 टन कांस्य और 22,500 टन स्टील का उपयोग हुआ।

एकजुटता का अनूठा प्रदर्शन

आज के समापन समारोह में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने प्रतिभागियों के साथ गरुड़ेश्वर दत्त मंदिर से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक पैदल यात्रा की।

यह पदयात्रा हाल के समय के सबसे बड़े जन-नेतृत्व वाले आंदोलनों में से एक बन गई है। आज का समारोह इस बात का प्रमाण था कि सरदार पटेल का एकता का सपना आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में जीवित है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: आंकड़ों में एक सफलता की गाथा

· पर्यटक आकर्षण: उद्घाटन के बाद से अब तक 2.75 करोड़ से अधिक पर्यटक इस स्मारक को देखने आ चुके हैं। दिवाली जैसे त्योहारों पर तो रोजाना 30 से 40 हजार पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
· आर्थिक प्रभाव: टिकट बिक्री से ही 400 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व अर्जित किया जा चुका है।
· रोजगार सृजन: इस परियोजना ने स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है। मार्च 2020 तक लगभग 3000 लोगों को पर्यटन से जुड़ी नौकरियां मिली थीं।
· क्षेत्रीय विकास: केवड़िया (अब एकता नगर) का पूरा आदिवासी बहुल क्षेत्र एक विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र में बदल गया है।

विविधता में एकता का जीवंत उत्सव

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का केंद्र बन गया है। हाल ही में यहां ‘भारत पर्व’ का आयोजन किया गया, जिसमें मध्यप्रदेश दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को प्रदर्शित किया गया।

इससे पहले नवंबर में, ‘द यूनिटी ट्रेल – साइकिल ऑन संडे’ कार्यक्रम में गुजरात और अन्य राज्यों के 650 से अधिक साइकिलिस्टों ने भाग लेकर राष्ट्रीय एकता और स्वदेशी की भावना को मजबूत किया।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और भविष्य की योजनाएं

संयुक्त राष्ट्र के राजदूत डॉ. इवांस क्वाडियो अफेदी ने हाल ही में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का दौरा कर इसकी स्थापत्य कला की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह “एकता, दूरदर्शिता और राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक” है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास के क्षेत्र को और विकसित करने के लिए 800 करोड़ रुपये की लागत से 5 नई परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया है, जिनमें स्मार्ट बस स्टॉप और नए गार्डन शामिल हैं।

एक अमर विरासत की गवाही

सरदार पटेल की यह विशाल प्रतिमा न केवल उन्हें एक श्रद्धांजलि है, बल्कि भारत की अदम्य इच्छाशक्ति और एकजुटता का प्रतीक भी है। आज समाप्त हुई पदयात्रा ने एक बार फिर साबित किया कि सरदार पटेल का “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” का सपना आज भी प्रासंगिक है।

जिस तरह सरदार पटेल ने 565 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर आधुनिक भारत की नींव रखी, उसी तरह स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देश के कोने-कोने से आए लोगों को एक मंच पर लाती है। यह स्मारक हमें याद दिलाता है कि विविधता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

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Author: ainewsworld

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