बाल विवाह के खिलाफ ऐतिहासिक जन-आंदोलन: सरकार ने शुरू किया 100 दिवसीय राष्ट्रीय अभियान”

“हर बेटी और हर बेटा सम्मान, सुरक्षा और समान अधिकारों के साथ अपना भविष्य गढ़ सके” – यह संकल्प लेकर आज से शुरू हुआ है एक नया राष्ट्रीय अभियान।

 

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज विज्ञान भवन, नई दिल्ली से बाल विवाह मुक्त भारत के लिए 100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ के अवसर पर की।

अभियान क्यों है जरूरी?

बाल विवाह भारत में पीढ़ियों से चली आ रही एक गंभीर सामाजिक चुनौती है, जो मुख्य रूप से शिक्षा और संसाधनों तक सीमित पहुंच वाले समुदायों में प्रचलित है। यह प्रथा बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य के विकास पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डालती है।

इसके विरुद्ध बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है, जिसके अनुसार लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इस कानून के उल्लंघन पर 2 साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है।

कैसे चलेगा यह 100 दिवसीय अभियान?

यह राष्ट्रव्यापी अभियान 27 नवंबर 2025 से शुरू होकर 8 मार्च 2026 (अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस) तक चलेगा। इसे एक सुनियोजित तीन-चरणीय रणनीति के तहत कार्यान्वित किया जा रहा है:

प्रथम चरण (27 नवंबर – 31 दिसंबर 2025): युवा मन को जागृत करना

इस चरण में स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वाद-विवाद, निबंध प्रतियोगिताएं, संवादात्मक सत्र और प्रतिज्ञा समारोह आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को बाल विवाह के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।

द्वितीय चरण (1 – 31 जनवरी 2026): समुदाय के स्तंभों को जोड़ना

इस महीने धार्मिक नेताओं, सामुदायिक प्रभावशाली व्यक्तियों और विवाह सेवा प्रदाताओं के साथ संवाद किया जाएगा। उद्देश्य है बाल अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण के संदेश को व्यापक बनाना।

तृतीय चरण (1 फरवरी – 8 मार्च 2026): जमीनी स्तर पर प्रतिबद्धता

इस अंतिम चरण में ग्राम पंचायतों और नगर पालिका वार्डों को अपने-अपने क्षेत्र को बाल विवाह मुक्त घोषित करने वाले प्रस्ताव पारित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

पहले से क्या है तैयारी?

मंत्रालय पहले से ही इस दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुका है:

· डिजिटल पोर्टल: उन्नत ‘बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल’ पर देश भर के 38,000 से अधिक बाल विवाह निषेध अधिकारियों (CMPO) की जानकारी उपलब्ध है। नागरिक इस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कर सकते हैं, प्रगति पर नज़र रख सकते हैं और ऑनलाइन प्रतिज्ञा ले सकते हैं।
· जन-आंदोलन: अब तक 26 लाख से अधिक नागरिकों और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं ने इस अभियान से सीधे जुड़कर इसे एक जन आंदोलन का स्वरूप दिया है।
· बहु-मंत्रालयी समन्वय: यह अभियान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, पंचायती राज, ग्रामीण विकास और शिक्षा मंत्रालयों के साथ मिलकर चलाया जा रहा है ताकि हर स्तर पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

किन क्षेत्रों पर है विशेष फोकस?

यह अभियान उन राज्यों पर विशेष ध्यान केंद्रित करेगा जहां बाल विवाह की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इनमें शामिल हैं:

· पश्चिम बंगाल
· बिहार
· झारखंड
· राजस्थान
· त्रिपुरा
· असम
· आंध्र प्रदेश

विशेषज्ञ नजरिया: एक सामूहिक जिम्मेदारी

राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने इस अभियान की समुदाय-आधारित प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि बाल विवाह को समाप्त करना केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं, बल्कि एक सामाजिक उत्तरदायित्व और सामूहिक सतर्कता का विषय है। उन्होंने पंचायतों, धर्मगुरुओं, युवा समूहों और सामुदायिक नेटवर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

आप कैसे जुड़ सकते हैं?

· जागरूक बनें और जागरूक करें: बाल विवाह के कानूनी और सामाजिक पहलुओं की जानकारी हासिल करें और दूसरों को भी बताएं।
· ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करें: बाल विवाह मुक्त भारत पोर्टल पर जाएं। घटनाओं की रिपोर्ट करें, प्रतिज्ञा लें और प्रगति देखें।
· सामुदायिक संवाद में हिस्सा लें: अपने क्षेत्र में आयोजित होने वाली जागरूकता गतिविधियों, चर्चाओं या कार्यशालाओं में शामिल हों।
· शिकायत दर्ज करें: यदि आपके आस-पास कहीं बाल विवाह होता हुआ दिखे, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन, पुलिस या CMPO को सूचित करें। आप पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत कर सकते हैं।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान भारत की उस बड़ी दृष्टि का हिस्सा है, जिसके तहत वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र का निर्माण करना है। यह केवल सरकारी पहल नहीं, बल्कि एक सच्चा जन आंदोलन है, जिसकी सफलता हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है। जैसा कि केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने कहा, इसका उद्देश्य एक ऐसे भारत का निर्माण करना है, जहां हर बच्चा अपने सपनों को पूरा करने के लिए स्वतंत्र हो।

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Author: ainewsworld

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