भारत की सांस्कृतिक धरोहर और साहित्यिक विरासत को समर्पित साहित्योत्सव 2025 का शुभारंभ आज राजधानी दिल्ली में धूमधाम से हुआ। साहित्य अकादेमी द्वारा आयोजित इस महाकुंभ को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रिबन काटकर और दीप प्रज्वलित कर शुरू किया। इस अवसर पर उन्होंने साहित्य को “भारत की एकता का सबसे मज़बूत सूत्र” बताते हुए कहा, “आज तकनीक और अनुवाद के माध्यम से हमारा साहित्य वैश्विक पहचान बना रहा है। दुनिया अब भारत को नए नज़रिए से देख रही है।”
साहित्य की गतिशीलता है भारत की पहचान
मंत्री शेखावत ने भारतीय साहित्य की “गतिशीलता और जीवंतता” पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह हर युग में प्रासंगिक रहा है। “हमारी मनीषा ने पुरातन को नवीन बनाकर समस्याओं का समाधान दिया है। साहित्य न केवल जीवन को दिशा देता है, बल्कि सामाजिक बदलाव का सूत्रधार भी है,” उन्होंने उद्घाटन सत्र में कहा। इस मौक़े पर संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती अमृता प्रसाद साराभाई और साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष श्री माधव कौशिक भी मौजूद रहे। कौशिक ने मंत्री का पारंपरिक शॉल, पुस्तक और पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
प्रदर्शनी में झलकी अकादेमी की उपलब्धियाँ
उद्घाटन के बाद ‘साहित्य अकादेमी प्रदर्शनी 2024’ का दौरा किया गया, जिसमें पिछले वर्ष की उपलब्धियों को चित्रों, दस्तावेज़ों और लेखों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। अकादेमी के सचिव श्री महादेव ने बताया कि संस्था ने पिछले साल 484 पुस्तकों का प्रकाशन और 459 साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया, जो एक नया रिकॉर्ड है।
पहले दिन की चर्चा: आदिवासी साहित्य से लेकर लुप्त होते गाँव तक
साहित्योत्सव के पहले दिन ही 20 से अधिक सत्रों में 100 लेखकों ने विमर्श में हिस्सा लिया। “आदिवासी कविता और कहानी-पाठ” सत्र में मौखिक परंपराओं की समृद्धि को रेखांकित किया गया, वहीं “भारतीय साहित्य में नदियों की अवधारणा” पर चर्चा में गंगा, नर्मदा और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियों के सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया गया। एक अन्य सत्र “लुप्त होता ग्रामीण समाज” में शहरीकरण के प्रभावों पर गंभीर सवाल उठाए गए। बहुभाषी कवि सम्मेलन और कहानी पाठ ने दर्शकों को भारतीय भाषाओं की बहुरंगी छटा से रूबरू कराया।
आज का हाइलाइट: साहित्य अकादेमी पुरस्कार समारोह
आज शाम 5 बजे कमानी सभागार में साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2024 का समारोह होगा, जिसकी मुख्य अतिथि प्रख्यात नाटककार महेश दत्तानी होंगे। पुरस्कार वितरण के बाद बाँसुरी वादक पंडित राकेश चौरसिया का विशेष प्रस्तुति सभी को मंत्रमुग्ध करेगी।
साहित्यप्रेमियों की प्रतिक्रिया
दर्शकों ने इस आयोजन को “भारतीय भाषाओं का समग्र महोत्सव” बताया। एक श्रोता ने कहा, “यहाँ हर भाषा और संस्कृति को समान सम्मान मिलता है। साहित्योत्सव ने हमें भारत की आत्मा से जोड़ दिया है।”
अगले तीन दिन तक चलने वाले इस उत्सव में विमर्श, कविता, नाटक और संगीत के माध्यम से साहित्य की अद्वितीय यात्रा जारी रहेगी।

Author: ainewsworld



