भारत और इस्राएल ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) का आदान-प्रदान किया है। यह महत्वपूर्ण सौदे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई प्रतिनिधिमंडल स्तर की व्यापक वार्ता के बाद संपन्न हुए। दोनों नेताओं ने न सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने पर जोर दिया, बल्कि वैश्विक मंच पर आतंकवाद और शांति जैसे मुद्दों पर भी एकजुटता दिखाई।
संस्कृति से लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक: ये हैं प्रमुख समझौते
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों में पारंपरिक क्षेत्रों के साथ-साथ भविष्य की तकनीक पर भी विशेष फोकस किया गया है। जिन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, वे इस प्रकार हैं:
1. सांस्कृतिक आदान-प्रदान: दोनों प्राचीन सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने और कलाकारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन दिया जाएगा।
2. भू-भौतिकीय अन्वेषण: प्राकृतिक संसाधनों की खोज और उनके वैज्ञानिक दोहन के लिए संयुक्त रूप से भू-भौतिकीय सर्वेक्षण किए जाएंगे।
3. मत्स्य पालन और जलीय कृषि: भारत के तटीय क्षेत्रों और अंतर्देशीय जल संसाधनों के सदुपयोग के लिए इस्राएल की उन्नत तकनीक का लाभ उठाया जाएगा, जिससे मछली उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।
4. यूपीआई (UPI) का विस्तार: एक बड़ी उपलब्धि के तहत, इस्राएल में भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) प्रणाली को लागू करने पर सहमति बनी है। इससे दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन सरल और डिजिटल हो जाएगा, जिससे आम नागरिकों और व्यापारियों को सीधा फायदा मिलेगा।
5. एआई आधारित शिक्षा (AI in Education): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग से शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति लाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म, स्मार्ट क्लासरूम और स्किल डेवलपमेंट के लिए संयुक्त कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ का ऐतिहासिक फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “विशेष रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “भारत-इस्राएल संबंध गहरे विश्वास, साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और गहन मानवीय संवेदनशीलता की मजबूत नींव पर आधारित हैं। यह बंधन समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने इस्राएल की धरती पर एक बार फिर आने को गर्व और भावुकता का क्षण बताया। उन्होंने नौ साल पहले इस्राएल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने के अनुभव को भी साझा किया।
उभरती प्रौद्योगिकी में साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों पक्षों ने महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी (आईसीईटी) में साझेदारी स्थापित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, “इससे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), क्वांटम तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी।” यह साझेदारी दोनों देशों को तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक मानक स्थापित करने में मददगार साबित होगी।
आतंकवाद और गाजा मुद्दे पर एकजुटता
दोनों नेताओं ने वैश्विक आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया, “भारत और इज़राइल इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं कि विश्व में आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। किसी भी रूप में, किसी भी अभिव्यक्ति में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है।” उन्होंने कहा कि दोनों देश आतंकवाद और उसके समर्थकों का विरोध करने में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
गाजा में चल रहे मानवीय संकट पर चिंता व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि “मानवता कभी भी संघर्ष का शिकार नहीं होनी चाहिए।” उन्होंने गाजा शांति योजना का स्वागत करते हुए भारत द्वारा शांति के प्रयासों का पूर्ण समर्थन करने की बात दोहराई।
नेतन्याहू बोले- हम मिलकर भविष्य गढ़ेंगे
इस्राएल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इस्राएल और भारत नवाचार के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, “दोनों राष्ट्र गौरवशाली प्राचीन सभ्यताएं हैं और अपने अतीत पर बहुत गर्व करते हैं, लेकिन हम भविष्य को अपने हाथों में लेने के लिए पूरी तरह से दृढ़ संकल्पित हैं।” उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश मिलकर इस भविष्य को बेहतर ढंग से गढ़ सकते हैं।
यह ऐतिहासिक समझौता न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि भारत को प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेता के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
Author: ainewsworld