केरल अब होगा ‘केरलम’! मोदी कैबिनेट ने राज्य के नाम बदलने के प्रस्ताव पर लगाई मुहर, जानिए पूरा गणित

मलयालम भाषा में हमेशा से ‘केरलम’ रहा है नाम, 2024 में विधानसभा ने पारित किया था प्रस्ताव, अब केंद्र सरकार ने दी औपचारिक मंजूरी

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नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम | 25 फरवरी 2026

नई दिल्ली: एक ऐतिहासिक फैसले में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आधिकारिक तौर पर ‘केरल’ राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही सांस्कृतिक और भाषाई मांग को पूरा करता है, जिसमें राज्य के मूल मलयालम उच्चारण को आधिकारिक मान्यता देने की बात कही जा रही थी।

कैबिनेट की इस स्वीकृति के बाद अब यह प्रस्ताव आगे की संवैधानिक प्रक्रिया के लिए भेजा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को केरल राज्य विधानसभा को भेजा जाएगा। हालांकि, यह भेजना महज एक औपचारिकता है, क्योंकि यह मांग खुद केरल विधानसभा की ओर से ही उठाई गई थी।

क्यों पड़ी नाम बदलने की जरूरत?

दरअसल, आधिकारिक तौर पर अंग्रेजी और हिंदी सहित कई भाषाओं में इस राज्य को ‘केरल’ के नाम से जाना जाता है, लेकिन स्थानीय मलयालम भाषा में इसे हमेशा ‘केरलम’ (Keralam) कहा जाता रहा है। भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के समय 1 नवंबर 1956 को केरल राज्य का गठन हुआ था, जिसे केरल पिरवी दिवस (जन्म दिवस) के रूप में मनाया जाता है।

इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, केरल विधानसभा ने 24 जून 2024 को एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ किए जाने की मांग की थी। विधानसभा में पारित प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया था, “मलयालम भाषा में हमारे राज्य का नाम ‘केरलम’ है, लेकिन संविधान की पहली अनुसूची में इसे ‘केरल’ दर्ज किया गया है। यह विसंगति लंबे समय से बनी हुई थी।”

क्या है आगे की प्रक्रिया?

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के निर्देशन में इस प्रस्ताव पर गृह मंत्रालय में गंभीरता से विचार किया गया। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने भी इस बदलाव पर अपनी सहमति दे दी थी, जिसके बाद इसे कैबिनेट के समक्ष रखा गया।

अब संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत पूरी प्रक्रिया इस प्रकार होगी:

1. राष्ट्रपति की अनुशंसा: सबसे पहले राष्ट्रपति इस विधेयक को केरल विधानसभा को भेजेंगी।
2. विधानसभा की राय: हालांकि विधानसभा पहले ही प्रस्ताव पारित कर चुकी है, औपचारिक रूप से उसकी राय ली जाएगी।
3. संसद में पेश: विधानसभा की राय आने के बाद, सरकार इसे संसद के शीतकालीन या मानसून सत्र में ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ के रूप में पेश करेगी।
4. मंजूरी: दोनों सदनों से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद संविधान की पहली अनुसूची में संशोधन किया जाएगा और राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर ‘केरलम’ हो जाएगा।

क्या बोले जानकार और क्या है राजनीतिक महत्व?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केंद्र सरत्री की क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतिक अस्मिता को सम्मान देने की नीति के अनुरूप है। इससे पहले ओडिशा का नाम बदलकर ‘ओडिशा’ किया गया था, जो इसी तरह की भाषाई मांग थी। केरल में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और विपक्षी कांग्रेस ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, हालांकि सियासी गलियारों में इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री और साहित्य जगत ने भी इस फैसले की सराहना करते हुए इसे “पहचान की वापसी” बताया है। अब आधिकारिक तौर पर स्कूली किताबों से लेकर रेलवे स्टेशनों और सरकारी दस्तावेजों तक में ‘केरल’ की जगह ‘केरलम’ नजर आएगा।

यह बदलाव न सिर्फ औपचारिकता है, बल्कि करोड़ों मलयाली लोगों की भावनाओं और उनकी भाषाई विरासत से जुड़ा एक अहम पड़ाव है।

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Author: ainewsworld

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