भारत की सुरक्षित डिजिटल क्रांति: ICANN की मुंबई बैठक, 1 अरब उपयोक्ताओं के साथ वैश्विक मंच पर दमखम

भारत की सुरक्षित डिजिटल क्रांति ने वैश्विक मंच पर बढ़ाई अपनी धाक, मुंबई में ICANN की महत्वपूर्ण बैठक

भारत की डिजिटल क्रांति का प्रतिनिधित्व करता हुआ चित्र: एक हाथ में स्मार्टफोन, उस पर यूपीआई लोगो, और पृष्ठभूमि में डिजिटल कनेक्शन नेटवर्क। सुरक्षित और समावेशी तकनीक।
इलेक्ट्रॉनिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत का डिजिटल परिवर्तन सुरक्षित, समावेशी और सशक्त है। मुंबई में आयोजित होने वाली ICANN बैठक वैश्विक इंटरनेट के भविष्य के लिए अहम होगी।

नई दिल्ली: भारत की डिजिटल यात्रा अब एक सुरक्षित, समावेशी और सशक्त मॉडल के रूप में उभर रही है। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का डिजिटल परिवर्तन न सिर्फ देश के भीतर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक मिसाल बन गया है।

मुंबई में होगी ICANN की अहम बैठक, वैश्विक इंटरनेट नीति पर होगी चर्चा

सचिव एस. कृष्णन ने नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आईकैन (ICANN) की प्रस्तावित बैठक इंटरनेट से जुड़े सभी पक्षकारों को साथ लेकर चलने के प्रति भारत सरकार की गहरी वचनबद्धता को दर्शाती है। यह बैठक इस वर्ष 7 से 12 मार्च के बीच मुंबई में आयोजित की जाएगी, जिसका आयोजन भारतीय राष्ट्रीय इंटरनेट एक्सचेंज (NIXI) द्वारा किया जा रहा है।

कृष्णन ने कहा, “इस बैठक का प्रमुख उद्देश्य ऐसी नीतियों को बढ़ावा देना है जो नवाचार, डिजिटल समावेशन और वैश्विक साइबरस्पेस में विश्वास को मजबूती प्रदान करें। यह भारत की वैश्विक इंटरनेट शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी को रेखांकित करता है।”

दुनिया के हर पांच इंटरनेट उपयोक्ताओं में से एक भारतीय

अपने संबोधन में सचिव कृष्णन ने एक महत्वपूर्ण आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में इंटरनेट के लगभग 5 अरब उपयोक्ताओं में से लगभग 1 अरब उपयोक्ता अकेले भारत से हैं। यानी, विश्व का हर पाँचवाँ इंटरनेट उपयोक्ता एक भारतीय है। यह आंकड़ा भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और इसकी वैश्विक अहमियत को स्पष्ट करता है।

भारत का डिजिटल मॉडल: अमेरिका, यूक्रेन, रूस सहित वैश्विक प्लेटफॉर्म के लिए एक मिसाल

भारत का ‘सुरक्षित और समावेशी डिजिटलीकरण’ का मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन रहा है। डिजिटल पहचान (आधार), यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), और को-विन प्लेटफॉर्म जैसी सफलताओं ने दुनिया भर के देशों का ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यूक्रेन, रूस जैसे देश जहाँ डिजिटल अवसंरचना और साइबर सुरक्षा चुनौतियाँ हैं, वहीं अमेरिका जैसे विकसित देश भी डिजिटल सार्वजनिक वितरण और समावेशन के भारतीय मॉडल से सीख ले रहे हैं।

मुंबई में होने वाली ICANN की बैठक में वैश्विक इंटरनेट नाम और नंबर प्रबंधन, साइबर सुरक्षा मानकों, और बहु-हितधारक शासन मॉडल पर चर्चा होगी। भारत की मेजबानी इस बात का संकेत है कि वैश्विक इंटरनेट के भविष्य की दिशा तय करने में अब भारत की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

सचिव कृष्णन ने निष्कर्ष में कहा, “हमारा लक्ष्य एक ऐसा डिजिटल भविष्य बनाना है जो न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हो, बल्कि मानव-केंद्रित, विश्वसनीय और सभी के लिए सुलभ हो। ICANN की यह बैठक इस दिशा में एक सार्थक कदम है।”

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Author: ainewsworld

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