
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: आई-पैक छापों पर ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर पर रोक, ममता बनर्जी समेत शीर्ष अधिकारियों को नोटिस
देश की सर्वोच्च अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच टकराव से जुड़े एक बेहद अहम मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह मामला कोलकाता स्थित राजनीतिक रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) के कार्यालय और उसके सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर की गई तलाशी से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसे संघीय ढांचे और कानून के शासन से जुड़ा गंभीर विषय मानते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस आयुक्त और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला? ( पूरा समझिए पॉइंट-वाइज)
➤ 1. आई-पैक पर ईडी की तलाशी
ईडी ने हाल ही में कोलकाता में आई-पैक के कार्यालय और प्रतीक जैन के घर पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया।
ईडी का दावा है कि यह कार्रवाई कानूनी अधिकारों के तहत की गई थी।
➤ 2. पश्चिम बंगाल पुलिस की एंट्री
तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों को कथित रूप से राज्य पुलिस के हस्तक्षेप और विरोध का सामना करना पड़ा।
इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी।
➤ 3. सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक
ईडी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर पर रोक लगा दी।
कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं में केंद्रीय एजेंसियों की जांच में राज्य हस्तक्षेप जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और सख्त निर्देश
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की पीठ ने कहा:
❝यदि ऐसे मुद्दों को अनसुलझा छोड़ा गया, तो यह अराजकता को जन्म दे सकता है❞
❝कानून का शासन सर्वोपरि है और सभी एजेंसियों को उसका पालन करना चाहिए❞
CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश
कोर्ट ने अगली सुनवाई तक:
तलाशी स्थल
आसपास के इलाकों
और सभी सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल रिकॉर्डिंग उपकरणों
को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
अगली सुनवाई कब?
प्रतिवादियों को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई अगले महीने की 3 तारीख को तय की गई है।
ईडी के गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि:
तलाशी के दौरान ईडी अधिकारियों को अपने वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन से रोका गया
पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने:
जांच में बाधा डाली
कथित तौर पर सबूत हटाने में मदद की
ईडी ने डीजीपी सहित वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कानूनी बहस: केंद्र बनाम राज्य
➤ सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का पक्ष
उन्होंने कहा कि:
पहले भी जब-जब केंद्रीय एजेंसियों ने कानूनी कार्रवाई की,
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप किया
इसे उन्होंने “चौंकाने वाला पैटर्न” बताया।
➤ वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलील
उन्होंने ईडी के आरोपों को सरासर गलत बताया।
कहा कि:
यह दावा सही नहीं है कि सभी डिजिटल उपकरण जब्त कर लिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट किन सवालों पर करेगा विचार?
क्या कोई राज्य सरकार या पुलिस
👉 किसी गंभीर अपराध की केंद्रीय जांच में हस्तक्षेप कर सकती है?
केंद्रीय एजेंसियों की स्वायत्तता और
👉 संघीय ढांचे की सीमाएं क्या हैं?
क्यों है यह मामला देश के लिए अहम?
यह मामला केवल ईडी और बंगाल सरकार का विवाद नहीं
बल्कि:
संविधान
केंद्र-राज्य संबंध
कानून के शासन
और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता
से सीधे जुड़ा हुआ है।
Author: ainewsworld