“अदम्य साहस की गाथा: एनसीएम ने वीर बाल दिवस पर युवाओं को किया प्रेरित”“
साहिबजादों ने उम्र की हदें तोड़ दीं और क्रूर मुगलों के सामने चट्टान की तरह खड़े रहे, धार्मिक कट्टरता और आतंक को हिलाकर रख दिया.”
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) ने शुक्रवार, 26 दिसंबर 2025 को वीर बाल दिवस के अवसर पर अपने कार्यालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश के युवाओं को साहिबजादों के अद्वितीय बलिदान और साहस से परिचित कराना और भारत के इतिहास के युवा नायकों को सम्मानित करना था।
कार्यक्रम की मुख्य बातें
· सक्रिय सहभागिता: 40 से अधिक बच्चों ने कहानी सुनाने, कविता पाठ, चित्रकारी और वाद-विवाद जैसी शैक्षिक गतिविधियों में भाग लिया।
· रचनात्मक अभिव्यक्ति: बच्चों ने ‘स्वच्छ भारत’ और स्वास्थ्य पर इसके प्रभाव जैसे विषयों पर निबंध लिखे।
· पुरस्कार वितरण: विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
· संस्थागत सहयोग: इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली स्थित गैर-सरकारी संगठन ‘स्कोप फॉर चेंज’ के सहयोग से किया गया।
वीर बाल दिवस का ऐतिहासिक महत्व
वीर बाल दिवस हर साल 26 दिसंबर को मनाया जाता है। यह दिन सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे साहिबजादों—जोरावर सिंह और फतेह सिंह के बलिदान को समर्पित है।
इतिहास के पन्नों से:
· सन् 1705 में, मुगल सेना ने गुरु गोबिंद सिंह जी के परिवार पर अत्याचार किए।
· गुरु जी के दो बड़े पुत्र, अजीत सिंह और जुझार सिंह, मुगलों से युद्ध करते हुए शहीद हुए।
· गुरु जी की माता, माता गुजरी, और दो छोटे साहिबजादे (जोरावर सिंह और फतेह सिंह) मुगलों द्वारा पकड़े गए।
· मुगल शासकों ने छोटे साहिबजादों पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला, लेकिन उन्होंने सिख धर्म छोड़ने से इनकार कर दिया।
· इसके बाद, उन्हें दीवार में जिंदा चिनवा दिया गया, जो भारतीय इतिहास की एक हृदयविदारक घटना है।
प्रधानमंत्री मोदी का ऐतिहासिक संबोधन
इसी दिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाग लिया और देशवासियों को संबोधित किया।
उनके संबोधन के प्रमुख अंश:
· गुलामी की मानसिकता से मुक्ति: “भारत ने तय किया है कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पानी ही होगी। अब हम भारतीयों के बलिदान, हमारे शौर्य की स्मृतियां दबेंगी नहीं।”
· नई पीढ़ी पर विश्वास: “Gen Z, Gen Alpha… आपकी जनरेशन ही भारत को विकसित भारत के लक्ष्य तक ले जाएगी। मैं Gen Z की योग्यता, आपका आत्मविश्वास देखता हूं, समझता हूं और इसलिए आप पर बहुत भरोसा करता हूं।”
· राष्ट्रीय बाल पुरस्कार: इस अवसर पर, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 18 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 20 बच्चों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया। यह पुरस्कार वीरता, कला, विज्ञान, सामाजिक सेवा, पर्यावरण और खेल के क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियों के लिए दिया जाता है।
एनसीएम कार्यक्रम का उद्देश्य और संदेश
एनसीएम द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को साहिबजादों के असाधारण साहस और सर्वोच्च बलिदान के बारे में शिक्षित करना था। कार्यक्रम में बच्चों ने न केवल अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित की, बल्कि देशभक्ति, वीरता और नैतिक शक्ति जैसे मूल्यों को भी आत्मसात किया।
एनसीएम की सचिव ने अपने समापन भाषण में कहा कि देश के बच्चों और युवाओं को प्रधानमंत्री के आह्वान का पालन करते हुए राष्ट्र निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित करना चाहिए।
Author: ainewsworld